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चंद्रकेश्वर मंदिर- एक अनूठा मंदिर जहां पानी में समाएं हैं भगवान शिव, च्यवन ऋषि ने की थी स्थापना

Posted on August 19, 2017 by Pankaj Goyal

Chandrakeshwar Temple | अब तक हम अपने इस ब्लॉग पर भगवान शिव से जुड़े अनेकों अनूठे मंदिरों के बारे में जानकारी दे चुके है। इसी कड़ी में आज भगवान शिव के एक ऐसे इकलौते मंदिर के बारे में बता रहे है जहां भगवान शिव सदैव जलमग्न रहते है। यह मंदिर देवास के चापड़ा में स्थित है। भोले के भक्त पानी के भीतर से ही उनकी आराधना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि च्यवनप्राश बनाने वाले च्यवन ऋषि ने चंद्रकेश्वर मंदिर की स्थापना की थी। उनके लिए स्वयं माता नर्मदा यहां प्रकट हुई थीं। कहा जाता है कि दुनिया में ऐसे तीन ही मंदिर थे, जिनमें से अब एक ही जीवंत स्थिति में है।

चंद्रकेश्वर मंदिर इंदौर से 65 किमी दूर इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग से लगा हुआ है। मंदिर के चारों तरफ सतपुड़ा की पहाड़ियां और घना जंगल है। प्राकृतिक वातावरण में बने इस मंदिर में हमेशा भक्तों की भीड़ रहती है।बताते है कि मंदिर में स्थापिंत शिवलिंग 2-3 हजार साल पुराना है।

पहाड़ियों के बीच बना है मंदिर

मंदिर के पुजारी के अनुसार इस मंदिर का इतिहास च्यवन ऋषि से जुड़ा है। कहते हैं कि उन्होंने यहां तपस्या की थी। उन्होंने ही इस मंदिर की स्थापना की थी। वे रोज स्नान के लिए 60 किमी दूर नर्मदा तट पर जाते थे। ऐसी मान्यता है कि उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर स्वयं मां नर्मदा ने उन्हें दर्शन दिए थे और कहा था कि मैं स्वयं आपके मंदिर में प्रकट हो रही हूं।

आसपास कई मनोरम झरने हैं

इस पर ऋषि ने कहा कि मैं ये कैसे समझ पाऊंगा की आप स्वयं मेरे मंदिर में प्रकट हुई हैं। इसके बाद उन्होंने अपना गमछा नर्मदा तट पर छोड़ दिया। कथा के अनुसार अगले दिन मंदिर में जलधारा फूट पड़ी और उनका गमछा भगवान शिव पर लिपटा हुआ मिला।

च्यवन ऋषि के बाद सप्त ऋषियों ने भी यहां तप किया था। यहां उनके नाम का एक कुंड भी बना हुआ है। कहते हैं इस कुंड में स्नान से पापों से मुक्ति मिल जाती है।

च्यवनप्राश बनाने वाले व्यावन ऋषि ने की थी यहां तपस्या

यहां सावन मास में रुद्राभिषेक किया जाता है। वैसे तो यहां लोगों का दर्शनार्थ आना-जाना रहता है, लेकिन श्रावण में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। सावन सोमवार पर दूर-दूर से लोग यहां आकर नर्मदा कुंड में स्नान कर जल मग्न शिवलिंग के दर्शन करते हैं।

देखने लायक ये है जगह- मंदिर के पास कई दर्शनीय और ऐतिहासिक स्थल हैं। यहां परमार और प्रतिहार काल की कई अद्भुत प्रस्तरशिल्प पाए जाते हैं। मंदिर के पास ही एक ही पत्थर पर उकेरी गई प्रतिहार कालीन दुर्लभ प्रतिमा है। कहते हैं ये प्रतिम सैकड़ों वर्ष पुरानी है- यहां कुछ गुफा और सदियों पुराने किले के अवशेष के अलावा श्रीविष्णु गोशाला श्रीराम मंदिर, अंबे माता मंदिर, हनुमान मंदिर मौजूद हैं।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े –   भारत के अदभुत मंदिर
पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह

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