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रामदेवरा मंदिर, रूणिचा धाम- बाबा रामदेव (रामापीर) का समाधी स्थल

Posted on August 28, 2017September 17, 2018 by Pankaj Goyal

Ramdevra Temple Runicha Dham | Hindi | राजस्थान में जैसलमेर से क़रीब 120 किलोमीटर दूर रामदेवरा में लोक देवता बाबा रामदेव की समाधि स्तिथ है। मान्यता है की यहां उन्होंने जीवित समाधि ली थी। यह स्थल रूणिचा धाम के नाम से प्रसिद्ध है। रामदेवरा जी की समाधि के निकट ही बीकानेर के महाराजा गंगासिंह द्वारा 1931 में बनवाया गया भव्य मंदिर स्थित हैं। सांप्रदायिक सदभाव के प्रतीक माने जाने वाले इस लोक देवता की समाधि के दर्शन के लिए विभिन्न धर्मों को मानने वाले भक्तों का यहां साल भर तांता लगा रहता है। भादों सुदी दो से भादों सुदी ग्यारह तक यहाँ प्रतिवर्ष एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता हैं, जिसमें रामासा पीर के लाखों भक्त पहुँचते है। लोककथाओं के अनुसार बाबा के पिता अजमाल और माता मीनल ने द्वारिका के मंदिर में प्रार्थना कर प्रभु से उन जैसी संतान प्राप्ति की कामना की थी। इसीलिए बाबा रामदेव को कृष्ण का अवतार माना जाता है।

यह भी पढ़े – रामदेव जयंती | रामसा पीर जयंती | Lok Devta Baba Ramdev Jayanti

Ramdevra Temple Runicha Dham

Ramdevra Temple Runicha Dham

रामदेवरा में स्थित अन्य दर्शनीय स्थल

रामसरोवररामसरोवर बाबा रामदेव मंदिर के पीछे की तरफ है। यह तक़रीबन 150 एकड़ क्षेत्र में फेला हुआ हैं एवं 25 फिट गहरा हैं। बारिश से पूरा भरने पर यह सरोवर बहुत ही रमणीय स्थल बन जाता हैं। मान्यता हैं कि बाबा ने गूंदली जाति के बेलदारों से इस तालाब की खुदाई करवाई थी। यह तालाब पुरे रामदेवरा की जलापूर्ति का स्रोत हैं। कहते हैं जांभोजी के श्राप के कारण यह सरोवर मात्र छः(6) माह ही भरा रहता हैं। भक्तजन यंहा आकर इस सरोवर में डूबकी लगा कर अपनी काया को पवित्र करते हैं एवं इसका जल अपने साथ ले जाते हैं तथा नित्य आचमन करते हैं।

परचा बावडीपरचा बावडी मंदिर के पास ही स्थित है। यहीं से बाबा के मंदिर में अभिषेक हेतु जलापूर्ति होती हैं। माना जाता हैं कि इस बावडी का निर्माण बाबा रामदेवजी के आदेशानुसार बाणिया बोयता ने करवाया था। लाखों श्रद्धालु परचा बावडी की सैंकड़ों सीढियां उतरकर यहाँ के दर्शन करने पहुँचते हैं। मान्यतानुसार अंधों को आँखें, कोढ़ी को काया देने वाला यह जल तीन पवित्र नदियों गंगा,यमुना और सरस्वती का मिश्रण हैं।

रूणीचा कुआरूणीचा कुआ रामदेवरा गाँव से दो किमी. दूर पूर्व में स्थित हैं। यहाँ पर रामदेवजी द्वारा निर्मित एक कुआ और बाबा का एक छोटा मंदिर भी हैं। चारों और सुन्दर वृक्ष और नवीन पौधों के वातावरण में स्थित यह स्थल प्रातः भ्रमण हेतु भी यात्रियों को रास आता हैं। मान्यता के अनुसार रानी नेतलदे को प्यास लगने पर बाबा रामदेव जी ने अपने भाले की नोक से इसी जगह पर पाताल तोड़ कर पानी निकाला था, तभी से यह स्थल “राणीसा का कुआ” के रूप में जाना जाता गया, लेकिन काफी सदियों से अपभ्रंश होते होते यह “रूणीचा कुआ” में परिवर्तित हो गया। इस दर्शनीय स्थल तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क मार्ग की सुविधा उपलब्ध हैं एवं रात्रि विश्राम हेतु विश्रामगृह भी बना हुआ है। मेले के दिनों में यहाँ बाबा के भक्तजन रात्रि में जम्मे का आयोजन भी करते है |

डाली बाई की जालडाली बाई कि जाल अर्थात वह पेड़ जिसके नीचे रामदेव जी को डाली बाई मिली थी. यह स्थल मंदिर से 3 किलोमीटर दूर NH15 पर स्थित हैं. कहते हैं कि रामदेवजी जब छोटे थे तब उन्हें उस पेड़ के नीचे एक नवजात शिशु मिला था। बाबा ने उसको डाली बाई नाम देते हुए अपनी मुहबोली बहिन बना दिया। डाली ने अपना संपूर्ण जीवन दलितों का उद्धार करने एवं बाबा कि भक्ति को समर्पित कर दिया. इसी कारण ही उन्हे रामदेव जी से पहले समाधी ग्रहण करने का श्रेय प्राप्त हुआ |

पंच पीपलीपंच पीपली वही स्थान है जहां पर बाबा ने मक्का से आये पांच पीरो को उन्ही के कटोरो, जो कि वे मक्का मे ही भूल गये थे, में भोजन करवाया था.उन्ही पांच पीरो के कारण वहा पांच पीपल के पेड उग आये थे, और बाबा को “पीरो के पीर रामसापीर” की उपाधि भी प्रदान की थी। यह स्थल मंदिर से 12 की.मी. दूर एकां गाँव में स्थित है। यहां पर बाबा रामदेव का एक छोटा सा मंदिर एवं सरोवर है।

गुरु बालीनाथ जी का धूणारामदेवजी के गुरु बालीनाथ जी का धूणा या आश्रम पोकरण में स्थित हैं । बाबा ने बाल्यकाल में यहीं पर गुरु बालीनाथ जी से शिक्षा प्राप्त की थी । यही वह स्थल हैं, जहाँ पर बाबा को बालिनाथजी ने भैरव राक्षस से बचने हेतु छिपने को कहा था । शहर के पश्चिमी छोर पर सालमसागर एवं रामदेवसर तालाब के बीच में स्थित गुरु बालीनाथ के आश्रम पर मेले के दौरान आज भी लाखों यात्री यहाँ आकर धुणें के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। बालिनाथजी के धुणें के पास ही एक प्राचीन बावडी भी स्थित हैं । रामदेवरा आने वाले लाखों श्रद्धालु यहाँ पर बाबा के गुरु महाराज का दर्शन करने अवश्य आते हैं ।

भैरव राक्षस गुफाबचपन मे बाबा रामदेव ने सभी जन मानस को भैरव नामक राक्षस के आतंक से मुक्त करवाया था। उस भैरव को बाबा ने एक गुफा मे आजीवन बंदी बना दिया था। यह गुफा मंदिर से 12 किमी. दूर पोकरण के निकट स्थित है। पहाडी पार स्थित यह गुफा भैरव राक्षस की शरणास्थली है। वहां तक जाने के लिये पक्का सडक मार्ग है |

श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिरश्री रामदेव बाबा के मंदिर से मात्र 1.5 किमी. दूर RCP रोड पर श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर,गुरु मंदिर एवं दादावाड़ी स्थित हैं। मंदिर पूर्णरूप से संगमरमर के पत्थर से बना हुआ हैं और इसकी अदभुत स्थापत्य कला एवं वास्तुकला मनोहर हैं। श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर की प्रतिष्ठा 4 जुलाई 2008 को हुई थी। मंदिर के पट्ट सुबह 6 बजे खुलते एवं रात्रि 9 बजे बंद होते हैं। यहाँ पर प्रतिवर्ष आषाढ़ सुदी 2 को ध्वजारोहण का सालाना महोत्सव भी आयोजित होता हैं। श्री जैन तीर्थ संस्थान के परिसर में एक जैन धर्मशाला भी स्थापित हैं। सम्पूर्ण सुविधा युक्त इस धर्मशाला में वातानुकूलन, लिफ्ट एवं भोजनशाला की भी व्यवस्था हैं।

छतरियां ( सतीयो की देवली )छतरियां या सतीयो की देवली प्राचीन समय में रानीयो के सती होने पर उनकी याद में बनाई गई है । यह स्थल पोकरण के निकट पहाडी पर स्थित है । प्राचीन जैसलमेर की कला पर आधारित यह छतरियां देखने में अत्यंत ही सुंदर है । मान्यता है कि इन छतरियो के खम्भे गिनना किसी के लिये भी संभव नही है । इन छतरियो के सामने ही एक छोटी सी झील भी स्थित है ।

पोकरण फोर्ट पोकरण फोर्ट 14 वीं सदी में बना राजस्थान के पुराने किलों में से एक है। यह किला “बालागढ” के नाम से भी जाना जाता है. वर्तमान में पोकरण किले के ठाकुर नागेन्द्र सिंह एवं ठकुरानी यशवंत कुमारी हैं पोकरण का किला प्राचीन स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण हैं। किले के अन्दर एक भव्य म्यूजियम भी स्थित हैं। वर्तमान में किले के अन्दर होटल का संचालन किया जा रहा हैं। विदेशी सैलानी यंहा पर अपना ठहराव करते है किले का सम्पूर्ण रख-रखाव ठाकुर साहब द्वारा ही किया जाता है |

कैलाश टेकरी कैलाश टेकरी एक अति प्राचीन जगह का नाम है जो कि पहाडी पर स्थित है। यहां पर दुर्गा मैया का एक भव्य मंदिर है। इस मंदिर की स्थापत्य कला एवं वास्तुकला प्रशंसनीय है। यह यात्रियो के लिये एक प्रकार से पिकनिक स्पोट भी है। कई विदेशी सैलानी भी यहां आकर मंदिर की अनुपम कला को निहारते है। यह स्थल पोकरण में स्थित है एवं यहां तक पहुचने के लिये पक्का सडक मार्ग है।

शक्ति स्थल शक्ति स्थल पोकरण से 1 किमी. पहले पोकरण-रामदेवरा मार्ग पर स्थित हैं । यह एक प्रकार का शौर्य संग्रहालय हैं । इस संग्रहालय में भारत की तीनो सेनाओ यथा जल,थल,वायु से सम्बंधित जानकारियां एकत्रित हैं । इस म्यूजियम में पोकरण परमाणु विस्फोट के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी गयी हैं । इस संग्रहालय में युद्ध में उपयोग हुए हथियार, अग्नि, ब्रम्होस जैसी विशाल मिसाइलों के मॉडल एवं यमराज व अन्य शक्तिशाली टैंकरों के प्रतिरूप भी प्रदर्शन हेतु रखे गए हैं । यह संग्रहालय भारतीय सेना की विशाल शक्ति का दुनिया को उदाहरण हैं ।

कैसे पहुंचे रामदेवरा
रामदेवरा रेल मार्ग एवं सड़क मार्ग दोनों से जुड़ा हुआ है। NH 15 रामदेवरा को छूती हुई निकलती है। नजदीकी Airport जोधपुर ( 180 किमी ) में स्थित है। दिल्ली से सीधे रेल द्वारा रामदेवरा पंहुचा जा सकता है। भारत में कंही से भी जोधपुर किसी भी माध्यम से पंहुचा जा सकता है जोधपुर से रामदेवरा 180 किमी है जो की रेल बस या निजी वाहन की सुविधा से पंहुचा जा सकता है।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े –   भारत के अदभुत मंदिर
पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह

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