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Bansuri Ban Jau

‘बांसुरी बन जाऊं’ – मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’

Posted on November 26, 2020 by Viveka Goyal

Bansuri Ban Jau – मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’ राजसमंद द्वारा रचित कविता ‘बांसुरी बन जाऊं’

Bansuri Ban Jau

‘बांसुरी बन जाऊं’ (Bansuri Ban Jau)

जी चाहता है,बांसुरी बन जाऊं|
तेरे अधरों पर सज जाऊं|
अधर सुधारस पी पी कर के|
मधु सुमधुर सुर बरसाऊं|
जी चाहता है,बांसुरी बन जाऊं|1|

जी चाहता है,पुष्प बन जाऊं|
सुमन सुगंध से सांसें महकाऊं|
मनमोहक मनोहर माला बन|
श्रृंगारित तन का अंग बन जाऊं|
जी चाहता है,बांसुरी बन जाऊं|2|

जी चाहता है,पितांबर बन जाऊं|
कोमल काया से
लिपटाऊं|
अंग अंग तेरा छू छू कर मैं|
तन अंग संग लहराती जाऊं|
जी चाहता है,बांसुरी बन जाऊं|3|

जी चाहता है,मुकुट बन जाऊं|
तेरे सिर की शोभा को पाऊं|
मोरपंख से सजधज कर|
अपने भाग्य पर खुब इतराऊं|
जी चाहता है,बांसुरी बन जाऊं|4|

जी चाहता है,राधा बन जाऊं|
तेरे सपनों में खो जाऊं|
तुझसे प्रेम करुं इतना|
तुम मैं, मैं तुम हो जाऊं|
जी चाहता है,बांसुरी बन जाऊं|5|

जी चाहता है,मीरा बन जाऊं|
तेरी सुरत पर मर जाऊं|
तेरे प्रेम की दीवानी बन|
सुंदर मूरत में मिल जाऊं|
जी चाहता है,बांसुरी बन जाऊं|6|

जी चाहता है,गोकुल बन जाऊं|
लकुटी कंबल धेनु बन जाऊं|
कालिंदी,कदंब की डाल बनु मैं|
सखा बनु संग खेलने जाऊं|
जी चाहता है,बांसुरी बन जाऊं|7|

मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’

मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’ राजसमंद द्वारा रचित रचनाएं-

  • रुढ़ कर तुम मुझसे कहां जाओगी
  • काह्ना
  • कही से महक आई हैं
  • जन जन झूम रहा हैं
  • ‘मुझे अच्छा लगता हैं’
  • ‘भारत पुण्य धरा हैं प्यारी’
  • प्रेम गीत – ‘संझा देखो फूल रहीं है’
  • ‘जैसे घुंघरू बजते हो’

यह भी पढ़े –

  • निदा फ़ाज़ली की शायरी और ग़ज़लों का संग्रह
  • मुनव्वर राना की 150 ग़ज़लों का संग्रह

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