12/12/2013

दिल में ना हो जुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती - निदा फ़ाज़ली

 दिल में न हो जुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती - Nida Fazli


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दिल में ना हो जुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती

दिल में ना हो जुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती
खैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती

कुछ लोग यूँ ही शहर में खफा हैं
हर एक से अपनी भी तबियत नहीं मिलती

देखा था जिसे मैंने कोई और था शायद
वो कौन है जिस से तेरी सूरत नहीं मिलती

हँसते हुए चेहरों से है बाज़ार की ज़ीनत
रोने को यहाँ वैसे भी फुर्सत नहीं मिलती

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Dil mein na ho jurrat to mohabbat nahi milti

Dil mein na ho jurrat to mohabbat nahi milti
Khairat mein itni badi daulat nahi milati

Kuchh log yun hi shehar mein hum se bhi khafaa hain
Har ek se apni bhi tabiyat nahi milti

Dekha tha jise maine koi aur tha shaayad
Wo kaun hai jis se teri surat nahi milti

Hanste huye chehron se hai baazaar ki zinat
Rone ko yahan waise bhi fursat nahi milti
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1 comment:

  1. तंग हो के ज़ईफ़ी से वो ज़ेरे-ख़ाक हो गए..,
    जन्नत नशीं से अपनी भी आदत नहीं मिलती.....
    ज़ईफ़ी = बुढ़ापा

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