12/17/2014

परशुराम कुण्ड - अरुणाचल प्रदेश - जहाँ मिली थी परशुराम जी को मातृ-हत्या के पाप से मुक्ति


Parushram Kund Lohit Arunachal Pradesh
परशुराम कुण्ड 

हमने हमारी एक पिछली पोस्ट में आप सबको राजस्थान के चितौड़ जिले में स्तिथ मातृकुण्डिया के बारे में बताया था जिसके बारे में मान्यता है की इसी कुण्ड में स्नान करने से भगवान परशुराम को अपनी माता की हत्या के पाप से मुक्ति मिली थी। लेकिन हाल ही में हमें ज्ञात हुआ की कुछ ऐसी ही मान्यता अरुणाचल प्रदेश में स्तिथ परशुराम कुण्ड से भी जुडी हुई है। इसलिए आज इस लेख में हम आपको परशुराम कुण्ड के बारे में जानकारी दे रहे है, पर आइए पहले जानते की परशुराम जी ने आखिर क्यों अपनी माता की हत्या की थी ?

ऊं को क्यों माना जाता है महामंत्र, इसे बोलने के फायदे


सनातन धर्म और ईश्वर में आस्था रखने वाला हर व्यक्ति देव उपासना के दौरान शास्त्रों, ग्रंथों में या भजन और कीर्तन के दौरान ऊं महामंत्र को कई बार पढ़ता, सुनता या बोलता है। धर्मशास्त्रों में यही ऊं प्रणव नाम से भी पुकारा गया है। असल में इस पवित्र अक्षर व नाम से गहरे अर्थ व दिव्य शक्तियां जुड़ीं हैं, जो अलग-अलग पुराणों और शास्त्रों में कई तरह से बताई गई हैं। खासतौर पर शिवपुराण में ऊं के प्रणव नाम से जुड़ी शक्तियों, स्वरूप व प्रभाव के गहरे रहस्य बताए हैं। ,

शिव पुराण के अनुसार - प्र यानी प्रपंच, न यानी नहीं और व: यानी तुम लोगों के लिए। सार यही है कि प्रणव मंत्र सांसारिक जीवन में प्रपंच यानी कलह और दु:ख दूर कर जीवन के सबसे अहम लक्ष्य यानी मोक्ष तक पहुंचा देता है। यही वजह है कि ऊं को प्रणव नाम से जाना जाता है।

12/16/2014

कैसे करे मोर पंख से नवग्रह दोष दूर

हिन्दू धर्म में मोर के पंखों का विशेष महत्तव है। शास्त्रों के अनुसार मोर के पंखों में सभी देवी-देवताओं और सभी नौ ग्रहों का वास होता है। ऐसा क्यों होता है इसकी हमारे धर्म ग्रंथों में कथा है जो इस प्रकार है -

प्रचलित कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने मां पार्वती को पक्षी शास्त्र में वर्णित मोर के महत्व के बारे में बताया है। प्राचीन काल में संध्या नाम का एक असुर हुआ था। यह बहुत शक्तिशाली और तपस्वी असुर था। गुरु शुकाचार्य के कारण संध्या देवताओं का शत्रु बन गया था।
Mor Pankh ke Jyotish Upaay
संध्या असुर ने कठोर तप कर शिवजी और ब्रह्मा को प्रसन्न कर लिया था। ब्रह्माजी और शिवजी प्रसन्न हो गए तो असुर ने कई शक्तियां वरदान के रूप में प्राप्त की। शक्तियों के कारण संध्या बहुत शक्तिशाली हो गया था। शक्तिशाली संध्या भगवान विष्णु के भक्तों का सताने लगा था। असुर ने स्वर्ग पर भी आधिपत्य कर लिया था, देवताओं को बंदी बना लिया था। जब किसी भी तरह देवता संध्या को जीत नहीं पा रहे थे, तब उन्होंने एक योजना बनाई।