4/23/2014

कुछ पुरातात्विक खोजे जिन्होंने वैज्ञानिकों को कर रखा है हैरान और परेशान

विशव में हर साल बहुत सी पुरातात्विक खोजे की जाती है। इन खोजो से हमे हमारे पिछले समय के बारे में काफी जानकारी मिलती है।  लेकिन कभी कभी कुछ ऐसी खोजे हो जाती है जिसका रहस्य वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाते है जैसे की सहारा के सुदूर रेगिस्तान में बना पत्थरो का ढांचा , या फिर कुछ ऐसी खोजे होती है जो वैज्ञानिको को हैरान कर के रख देती है जैसे की नवाडा में मिला विशाल इंसानी जबड़ा।  हम आपको आज कुछ ऐसी ही खोजो के बारे में विस्तार से बताएँगे।

1. शुद्ध लोहे से बना करोडो साल पुराना हथोड़ा (Hammer of the purest iron alloy) :-

Hammer of the purest iron alloy


इस धरती पर अब तक हुई  पुरातात्विक खोजो में से इस खोज ने वैज्ञानिको को सबसे ज्यादा हैरान किया है। अमेरिका में सन 1934 में  140 मिलियन साल पुरानी लाइमस्टोन की  चट्टानों में एक लोहे की हथोडी मिली। जब वैज्ञानिको ने इसका प्रयोगशाला मेंअध्यन्न किया तो वो दो कारणों से हैरान  रह गए। पहला की हथौड़े में लगा हुआ लकड़ी का हैंडल अंदर से कोयल बन चूका था, यानी की वो कई मिलियन साल पुरानी थी। दूसरा हैरान करने वाला कारण लोहे की एक दम शुद्ध अवस्था थी।  इतना शुद्ध लोहा  धरती की किसी भी खदान से आज तक  नहीं निकला है। लोहे की शुद्धता का अंदाज़ा इस बात से पता चलता है की 1934 में उसे चट्टान से निकलते  वक़्त खरोच  लगी  थी पर 80 साल बाद आज तक भी उस पर जंग लगने  के कोई लक्षण नहीं है। वैज्ञानिक इस हथौड़े का अनुमानित समय 145 से 60 मिलियन साल पूर्व मानते है यानी की  करोडो साल पूर्व जबकि मानव जाती ने 10000 साल पहले ही इस तरह के औजार बनाना सीखा है।

Khumar Barabankvi - Bujh gaya dil hayat baki hai (खुमार बाराबंकवी - बुझ गया दिल हयात बाक़ी है)


खुमार बाराबंकवी
Khumar Barabankvi


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बुझ गया दिल हयात बाक़ी है

बुझ गया दिल हयात* बाक़ी है
छुप गया चाँद रात बाक़ी है

हाले-दिल उन से कह चुके सौ बार
अब भी कहने की बात बाक़ी है

Munawwar Rana - Hamari bebasi dekho unhen hamdard kahte hai (मुनव्वर राना - हमारी बेबसी देखो उन्‍हें हमदर्द कहते हैं)


Munawwar rana
Munawwar Rana 


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हमारी बेबसी देखो उन्‍हें हमदर्द कहते हैं

हमारी बेबसी देखो उन्‍हें हमदर्द कहते हैं
जो उर्दू बोलने वालों को दहशतगर्द कहते हैं

मदीने तक में हमने मुल्‍क की ख़ातिर दुआ मांगी
किसी से पूछ ले इसको वतन का दर्द कहते हैं

4/22/2014

Nida Fazli - Kabhi kisi ko mukqammal jahan nahi milta (निदा फ़ाज़ली - कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता)


Nida fazli
Nida Fazli

निदा फ़ाज़ली जी की एक बेहतरीन ग़ज़ल।  जिसके की हम 1981 में आई फिल्म आहिस्ता-आहिस्ता में भूपिंदर और आशा भोसलें की आवाज़ में सुन चुके है। 

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कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता

जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है
ज़ुबां मिली है मगर हम-ज़ुबां नहीं मिलता

Khumar barabankvi - Kya Hua husan hai humsafar ya nahi (खुमार बाराबंकवी - क्या हुआ हुस्न है हमसफ़र या नहीं)



Khumar Barabankvi


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क्या हुआ हुस्न है हमसफ़र या नहीं

क्या हुआ हुस्न है हमसफ़र या नहीं
इश्क़ मंज़िल ही मंज़िल है रस्ता नहीं

ग़म छुपाने से छुप जाए ऐसा नहीं
बेख़बर तूने आईना देखा नहीं