5/27/2015

चाणक्य नीति- ध्यान रखें इन सातों को आपका पैर नहीं लगना चाहिए

हिंदू धर्म में प्राचीन काल से ही पुण्य और पाप कर्मों के संबंध में कई आवश्यक नियम प्रचलित हैं। इन्हीं के आधार पर हमारे कर्मों को पाप और पुण्य की श्रेणी में विभाजित किया जाता है। आचार्य चाणक्य ने कुछ ऐसे कार्य बताए हैं जिन्हें पाप की श्रेणी में रखा जाता है।

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Chankaya Neeti- In 7 ko aapka pair nahin lagna chahaiye
चाणक्य कहते हैं-

अनल विप्र गुरु धेनु पुनि, कन्या कुंवारी देत।
बालक के अरु वृद्ध के, पग न लगावहु येत।।

श्रीरामचरित मानस के 7 काण्ड (अध्याय) में से सुंदरकांड का सर्वाधिक महत्तव क्यों है?

तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस में कुल 7 काण्ड(अध्याय) है लेकिन इन सातों काण्ड में से सर्वाधिक महत्तव सुन्दर काण्ड का है। लेकिन ऐसा क्यों है आज हम इसका कारण जानेंगे।

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Importance Of Sundarkand In Hindi
श्रीरामचरित मानस में हैं 7 काण्ड
श्रीरामचरित मानस में 7 काण्ड (अध्याय) हैं। सुंदरकाण्ड के अतिरिक्त सभी अध्यायों के नाम स्थान या स्थितियों के आधार पर रखे गए हैं। बाललीला का बालकाण्ड, अयोध्या की घटनाओं का अयोध्या काण्ड, जंगल के जीवन का अरण्य काण्ड, किष्किंधा राज्य के कारण किष्किंधा काण्ड, लंका के युद्ध का लंका काण्ड और जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर उत्तरकाण्ड में दिए गए हैं।

वास्तु- 8 दरवाज़े, जो बताएंगे कि आप कैसे हैं और कैसा होगा आपका भविष्य

किसी भी घर में मेन दरवाजे का सबसे महत्वपूर्ण स्थान होता है। आप अपने घर के लिए कैसा मेन दरवाज़ा सिलेक्ट करते हैं, आपकी च्वॉइस से भी आपके व्यवहार और भविष्य के कई इशारे मिलते हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार भी घर के मुख्य दरवाज़े को लेकर आपकी च्वॉइस से आपके व्यक्तित्व, व्यवहार, जिंदगी को जीने के प्रति आपके नजरिए की और भविष्य में छिपे संकेत मिलते हैं।
Know Your Future By Selecting A Door

आज हम आपको ऐसे ही कुछ अलग-अलग डिज़ाइन के दरवाज़े दिखाने जा रहे हैं। हम आपको कुल आठ तरह के दरवाजे इस आर्टिकल में दिखाएंगे। आपको बस अपनी पसंद का एक दरवाज़ा चुनना है। आप जिस नंबर के दरवाज़े को चुनेंगे उसी से खुलेंगे आपके व्यवहार और भविष्य से जुड़े राज़।

5/26/2015

चाणक्य नीति- जानिए किस तरह के धर्म, गुरु, पत्नी और भाई-बहन का त्याग कर देना चाहिए

ऐसा माना जाता है कि पति और पत्नी का रिश्ता सात जन्मों का होता है। कई विपरित परिस्थितियों में भी पति-पत्नी एक-दूसरे का साथ निभाते हैं। यदि पत्नी सर्वगुण संपन्न है तो तब तो दोनों का जीवन सुखी बना रहता है लेकिन पत्नी हमेशा क्रोधित रहने वाली है तो दोनों के जीवन में हमेशा ही मानसिक तनाव बना रहता है।

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Chanakya Neeti about Guru, Patni, Bhai, Behan
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि-

त्यजेद्धर्मं दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत्।
त्यजेत्क्रोधमुखं भार्यां नि:स्नेहान् बान्धवांस्त्यजेत्।।