10/21/2014

जानिये भारत में स्तिथ यमराज (धर्मराज) के चार प्राचीन मंदिरों के बारे में

यदि आप इंटरनेट पर यमराज (धर्मराज) को समर्पित मंदिरों के बारे में सर्च करेंगे तो आप पाएंगे की अधिकतर साइटों पर हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नामक स्थान पर स्तिथ मंदिर को यमराज (धर्मराज) का इकलौता मंदिर बताया गया है पर वास्तव में ऐसा नहीं है आज हम आपको यहाँ यमराज (धर्मराज) को समर्पित चार प्राचीन मंदिरों के बारे में बातएंगे। पर पहले यहाँ यह जान लेना आवश्यक है की धर्मराज भी यमराज का ही एक नाम है। यमराज का नाम धर्मराज इसलिए पड़ा क्योंकि धर्मानुसार उन्हें जीवों को सजा देने का कार्य प्राप्त हुआ था।

यमराज (धर्मराज) मंदिर - भरमौर - हिमाचल :-

Image Credit 
यम देवता को समर्पित यह मंदिर हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नामक स्थान पर स्तिथ है।  यह जगह दिल्ली से करीब 500 किलोमीटर दूर स्तिथ है। यह मंदिर देखने में एक घर की तरह दिखाई देता है।  इस मंदिर में एक खाली कक्ष भी है जिसे चित्रगुप्त का कक्ष कहा जाता है। चित्रगुप्त यमराज के सचिव हैं जो जीवात्मा के कर्मो का लेखा-जोखा रखते हैं।

10/20/2014

Khumar Barabankvi - Ae maut unhein bhulaaye zamaane gujar gaye (खुमार बाराबंकवी - ऐ मौत उन्हें भुलाए ज़माने गुज़र गए)

Khumar Barabankvi (खुमार बाराबंकवी)
Khumar Barabankvi (खुमार बाराबंकवी)


-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

ऐ मौत उन्हें भुलाए ज़माने गुज़र गए

ऐ मौत उन्हें भुलाए ज़माने गुज़र गए
आ जा कि ज़हर खाए ज़माने गुज़र गए

ओ जाने वाले! आ कि तेरे इंतज़ार में
रस्ते को घर बनाए ज़माने गुज़र गए

Khumar Barabankvi - Kabhi sher-o-nagma banke kabhi aansuo mein dhalke ( ख़ुमार बाराबंकवी - कभी शेर-ओ-नगमा बनके कभी आँसूओ में ढलके)

Khumar Barabankvi (खुमार बाराबंकवी
Khumar Barabankvi (खुमार बाराबंकवी)

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

कभी शेर-ओ-नगमा बनके कभी आँसूओ में ढलके

कभी  शेर-ओ-नगमा बनके कभी आँसूओ में ढलके
वो मुझे मिले तो लेकिन, मिले सूरते बदलके

कि वफा की सख़्त राहे कि तुम्हारे पाव नाज़ुक
न लो इंतकाम मुझसे मेरे साथ-साथ चलके

क्यों व कैसे करते है धनतेरस पर भगवान यमराज को दीपदान?


Lord Yamraj
Image Credit Wikipedia
धनतेरस पर भगवान यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो धनतेरस के दिन दीपदान करता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता। इस मान्यता के पीछे पुराणों में वर्णित एक कथा है, जो इस प्रकार है।

पौराणिक कथा - क्यों करते है यमराज को दीपदान :-

एक समय यमराज ने अपने दूतों से पूछा कि क्या कभी तुम्हें प्राणियों के प्राण का हरण करते समय किसी पर दयाभाव भी आया है, तो वे संकोच में पड़कर बोले- नहीं महाराज! यमराज ने उनसे दोबारा पूछा तो उन्होंने संकोच छोड़कर बताया कि एक बार एक ऐसी घटना घटी थी, जिससे हमारा हृदय कांप उठा था। हेम नामक राजा की पत्नी ने जब एक पुत्र को जन्म दिया तो ज्योतिषियों ने नक्षत्र गणना करके बताया कि यह बालक जब भी विवाह करेगा, उसके चार दिन बाद ही मर जाएगा। यह जानकर उस राजा ने बालक को यमुना तट की एक गुफा में ब्रह्मचारी के रूप में रखकर बड़ा किया।

Ahmad Faraz - Qurbat bhi nahi dil se utar bhi nahi jata (अहमद फ़राज़ - कुर्बत भी नहीं दिल से उतर भी नहीं जाता)

Ahmad Faraz (अहमद फ़राज़) 

अहमद फ़राज़ जी की शायरी और ग़ज़लों की किताबें जैसे खानाबदोशये  ग़ज़लें ये मेरी नज़्मेंख़्वाब फरोश, आदि आप नीचे दिए फ्लिपकार्ट लिंक से घर बैठे खरीद सकते है।

Buy Khanabdosh from Flipkart.com
Buy Yeh Meri Gazlen Yeh Meri Nazmein from Flipkart.com
Buy Khawab Farosh
Buy Aaj Ke Prashid Shayar Ahmed Faraz from Flipkart.com

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

कुर्बत भी नहीं दिल से उतर भी नहीं जाता

कुर्बत* भी नहीं दिल से उतर भी नहीं जाता
वो शख़्स कोई फ़ैसला कर भी नहीं जाता

आँखें हैं के खाली नहीं रहती हैं लहू से
और ज़ख्म-ए-जुदाई है के भर भी नहीं जाता

10/19/2014

Ahmad Faraz - Usko juda hue bhi zamana bahut hua (अहमद फ़राज़ - उसको जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ)

Ahmad Faraz (अहमद फ़राज़) 

अहमद फ़राज़ जी की शायरी और ग़ज़लों की किताबें जैसे खानाबदोशये  ग़ज़लें ये मेरी नज़्मेंख़्वाब फरोश, आदि आप नीचे दिए फ्लिपकार्ट लिंक से घर बैठे खरीद सकते है।

Buy Khanabdosh from Flipkart.com
Buy Yeh Meri Gazlen Yeh Meri Nazmein from Flipkart.com
Buy Khawab Farosh
Buy Aaj Ke Prashid Shayar Ahmed Faraz from Flipkart.com

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

उसको जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ

उसको जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
अब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ

ढलती न थी किसी भी जतन से शब-ए-फ़िराक़*
ए मर्ग-ए-नगाहाँ* तेरा आना बहुत हुआ