Ajab Gajab

Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion, Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts

Menu
  • Pauranik Katha
  • Jyotish
  • Quotes
  • Shayari
  • Amazing India
  • Self Improvment
  • Health
  • Temple
  • Bizarre
Menu

पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की प्रेम कहानी (Prithviraj Chauhan & Sanyogita Love Story)

Posted on March 11, 2015March 1, 2016 by Pankaj Goyal

Prithviraj Chauhan – Sanyogita Love Story in Hindi : दिल्ली की राजगद्दी पर बैठने वाले अंतिम हिन्दू शासक और भारत के महान वीर योद्धाओं में शुमार पृथ्वीराज चौहान का नाम कौन नहीं जानता। एक ऐसा वीर योद्धा जिसने अपने बचपन में ही शेर का जबड़ा फाड़ डाला था और जिसने अपनी दोनों आंखें खो देने के बावजूद भी शब्द भेदी बाण से भरी सभा में मोहम्मद गौरी को मृत्यु का रास्ता दिखा दिया था।

 Prithviraj Chauhan - Sanyogita ki prem kahani in Hindi

ये सभी जानते हैं कि पृथ्वीराज चौहान एक वीर योद्धा थे लेकिन ये बहुत कम ही लोगों को पता है कि वो एक प्रेमी भी थे। वो कन्नौज के महाराज जय चन्द्र की पुत्री संयोगिता से प्रेम करते थे। दोनों में प्रेम इतना था कि राजकुमारी को पाने के लिए पृथ्वीराज चौहान स्वयंवर के बीच से उनका अपरहण कर लाए थे। आज इस लेख में हम आपको संयोगिता और पृथ्वीराज चौहान की प्रेम कहानी से लेकर मोहम्मद गौरी के अंत तक की कहानी बताएंगे।

दिल्ली की सत्ता संभालने के साथ हुआ था चौहाण को संयोगिता से प्यार

बात उन दिनों की है जब पृथ्वीराज चौहाण अपने नाना और दिल्ली के सम्राट महाराजा अनंगपाल की मृत्यु के बाद दिल्ली की राज गद्दी पर बैठे। गौरतलब है कि महाराजा अनंगपाल को कोई पुत्र नहीं था इसलिए उन्होंने अपने दामाद अजमेर के महाराज और पृथ्वीराज चौहाण के पिता सोमेश्वर सिंह चौहाण से आग्रह किया कि वे पृथ्वीराज को दिल्ली का युवराज घोषित करने की अनुमति प्रदान करें। महाराजा सोमेश्वर सिंह ने सहमति जता दी और पृथ्वीराज को दिल्ली का युवराज घोषित किया गया, काफी राजनीतिक संघर्षों के बाद पृथ्वीराज दिल्ली के सम्राट बने। दिल्ली की सत्ता संभालने के साथ ही पृथ्वीराज को कन्नौज के महाराज जयचंद की पुत्री संयोगिता भा गई।

सुंदरता के बखान को सुन राजकुमारी हो गईं थी देखने के लिए लालायित

उस समय कन्नौज में महाराज जयचंद्र का राज था। उनकी एक खूबसूरत राजकुमारी थी जिसका नाम संयोगिता था। जयचंद्र पृथ्वीराज की यश वृद्धि से ईर्ष्या का भाव रखा करते थे। एक दिन कन्नौज में एक चित्रकार पन्नाराय आया जिसके पास दुनिया के महारथियों के चित्र थे और उन्हीं में एक चित्र था दिल्ली के युवा सम्राट पृथ्वीराज चौहान का। जब कन्नौज की लड़कियों ने पृथ्वीराज के चित्र को देखा तो वे देखते ही रह गईं। सभी युवतियां उनकी सुन्दरता का बखान करते नहीं थक रहीं थीं। पृथ्वीराज के तारीफ की ये बातें संयोगिता के कानों तक पहुंची और वो पृथ्वीराज के उस चित्र को देखने के लिए लालायित हो उठीं।

पृथ्वीराज के मन में राजकुमारी की मूर्ति देख प्रेम उमड़ पड़ा

संयोगिता अपनी सहेलियों के साथ उस चित्रकार के पास पहुंची और चित्र दिखाने को कहा। चित्र देख पहली ही नजर में संयोगिता ने अपना सर्वस्व पृथ्वीराज को दे दिया, लेकिन दोनों का मिलन इतना सहज न था। महाराज जयचंद और पृथ्वीराज चौहान में कट्टर दुश्मनी थी। इधर चित्रकार ने दिल्ली पहुंचकर पृथ्वीराज से भेट की और राजकुमारी संयोगिता का एक चित्र बनाकर उन्हें दिखाया जिसे देखकर पृथ्वीराज के मन में भी संयोगिता के लिए प्रेम उमड़ पड़ा। उन्हीं दिनों महाराजा जयचंद्र ने संयोगिता के लिए एक स्वयंवर का आयोजन किया। इसमें विभिन्न राज्यों के राजकुमारों और महाराजाओं को आमंत्रित किया लेकिन ईर्ष्या वश पृथ्वीराज को इस स्वंयवर के लिए आमंत्रण नहीं भेजा।

राजकुमारी ने वरमाला मूर्ति को पहनाई और वो वास्तव में पृथ्वीराज के गले में पड़ी

राजकुमारी के पिता ने चौहाण का अपमान करने के उद्देश्य से स्वयंवर में उनकी एक मूर्ति को द्वारपाल की जगह खड़ा कर दिया। राजकुमारी संयोगिता जब वर माला लिए सभा में आईं तो उन्हें अपने पसंद का वर (पृथ्वीराज चौहाण) कहीं नजर नहीं आए। इसी समय उनकी नजर द्वारपाल की जगह रखी पृथ्वीराज की मूर्ति पर पड़ी और उन्होंने आगे बढ़कर वरमाला उस मूर्ति के गले में डाल दी। वास्तव में जिस समय राजकुमारी ने मूर्ति में वरमाला डालना चाहा ठीक उसी समय पृथ्वीराज स्वयं आकर खड़े हो गए और माला उनके गले में पड़ गई। संयोगिता द्वारा पृथ्वीराज के गले में वरमाला डालते देख पिता जयचंद्र आग बबूला हो गए। वह तलवार लेकर संयोगिता को मारने के लिए आगे आए, लेकिन इससे पहले की वो संयोगिता तक पहुंचे पृथ्वीराज संयोगिता को अपने साथ लेकर वहां से निकल पड़े।

प्यार के बदले में पृथ्वीराज को मिली कई यातानए

स्वयंवर से राजकुमारी के उठाने के बाद पृथ्वीराज दिल्ली के लिये रवाना हो गए। आगे जयचंद्र ने पृथ्वीराज से बदला लेने के उद्देश्य से मोहम्मद गौरी से मित्रता की और दिल्ली पर आक्रमण कर दिया। पृथ्वीराज ने मोहम्मद गौरी को 16 बार परास्त किया लेकिन पृथ्वीराज चौहान ने सहर्दयता का परिचय देते हुए मोहम्मद गौरी को हर बार जीवित छोड़ दिया। राजा जयचन्द ने गद्दारी करते हुए मोहम्मद गोरी को सैन्य मदद दी और इसी वजह से मोहम्मद गौरी की ताकत दोगुनी हो गयी तथा 17वी बार के युद्ध मे पृथ्वीराज चौहान मोहम्मद गोरी से द्वारा पराजित होने पर पृथ्वीराज चौहान को मोहम्मद गोरी के सैनिको द्वारा उन्‍हें बंदी बना लिया गया एवं उनकी आंखें गरम सलाखों से जला दी गईं। इसके साथ अलग-अलग तरह की यातनाए भी दी गई।

शब्दभेदी बाण से गोरी को उतारा मौत के घाट

अंतत: मो.गोरी ने पृथ्वीराज को मारने का फैसला किया तभी महा-कवि चंदरबरदाई  ने मोहम्मद गोरी तक पृथ्वीराज के एक कला के बारे में बताया। चंदरबरदाई जो कि एक कवि और खास दोस्त था पृथ्वीराज चौहान का। उन्होंने बताया कि चौहाण को शब्द भेदी बाण छोड़ने की काला मे महारत हासिल है। यह बात सुन मोहम्मद गोरी ने रोमांचित होकर इस कला के प्रदर्शन का आदेश दिया। प्रदर्शन के दौरान गोरी के “शाबास आरंभ करो” लफ्ज के उद्घोष के साथ ही भरी महफिल में चंदरबरदाई ने एक दोहे द्वारा पृथ्वीराज को मोहम्मद गोरी के बैठने के स्थान का संकेत दिया जो इस प्रकार है-
“चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण,
ता ऊपर सुल्तान है मत चुके चौहान।”
तभी अचूक शब्दभेदी बाण से पृथ्वीराज ने गोरी को मार गिराया। साथ ही दुश्मनों के हाथों मरने से बचने के लिए चंदरबरदाई और पृथ्वीराज ने एक-दूसरे का वध कर दिया। जब संयोगिता को इस बात की जानकारी मिली तो वह एक वीरांगना की भांति सती हो गई। इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में आज भी यह प्रेमकहानी अमर है।

अन्य ऐतिहासिक कहानियां
  • कहानी आम्रपाली की, जिसे उसकी खूबसूरती ने बना दिया था नगरवधू
  • कहानी राजा भरथरी (भर्तृहरि) की – पत्नी के धोखे से आहत होकर बन गए तपस्वी
  • कहानी हाड़ा रानी की – जिसने खुद अपने हाथो से अपना शीश काटकर पति को भिजवाया था निशानी के रुप में
  • यशवंतराव होलकर – जिनसे अंग्रेज भी खाते थे खौफ
  • पौराणिक कहानी: सेक्स कौन ज़्यादा एंजाय करता है – स्त्री या पुरुष?

Tag- Prithviraj chauhan and Sanyogita Love story, Prem kahani, History, Itihas, in Hindi, Muhammad ghori,  Jaichand

Related posts:

विश्व महासागर दिवस का इतिहास, उद्देश्य और महत्व
नागपंचमी की पौराणिक कथाएं
National Doctors Day History In Hindi, How to Celebrate?, When and Where Doctors Day is Celebrated
लघु कथा - भोग का फल | Laghu Katha - Bhog Ka Phal
रानी कर्णावती की कहानी और इतिहास
अप्रैल फूल डे का इतिहास | April Fool Day History In Hindi
शकुंतला-दुष्यंत की कहानी | Shakuntala Dushyant Story
लोक कथा - काम और कर्तव्य में अंतर
भक्त के भाव की मर्यादा बचाने के लिए, हनुमानजी ने दिया स्वयं प्रमाण
मतीरे की राड़ - जब एक मतीरे (तरबूज) के लिए लड़ा गया खुनी युद्ध

11 thoughts on “पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की प्रेम कहानी (Prithviraj Chauhan & Sanyogita Love Story)”

  1. Ajay Pandey says:
    January 1, 2017 at 10:12 am

    Prithviraj Chouhan ki jy ho

    Reply
  2. bhavna says:
    December 28, 2016 at 4:52 am

    Prithviraj chauhan and sayogita love each other

    Reply
  3. aman says:
    September 17, 2016 at 5:13 pm

    wow….

    Reply
  4. Anand says:
    May 20, 2016 at 12:36 pm

    Prithiraj chohan ki virta ko sat sat naman

    Reply
  5. ABHISHEK SINGH says:
    May 4, 2016 at 7:22 pm

    prithvi raj chauhan aur maharani sanyogit amar rahe ,,dhanya hai vo desh jaha aise vir huye.

    Reply
    1. Samrat says:
      May 27, 2017 at 2:10 pm

      जयचन्द पर देशद्रोही का आरोप लगाया जाता है। कहा जाता है कि उसने पृथ्वीराज पर आक्रमण करने के लिए गौरी को भारत बुलाया और उसे सैनिक संहायता भी दी। वस्तुत: ये आरोप निराधार हैं। ऐसे कोई प्रमाण नहीं हैं जिससे पता लगे कि जयचन्द ने गौरी की सहायता की थी। गौरी को बुलाने वाले देश द्रोही तो दूसरे ही थे, जिनके नाम पृथ्वीराज रासो में अंकित हैं। संयोगिता प्रकरण में पृथ्वीराज के मुख्य-मुख्य सामन्त काम आ गए थे। इन लोगों ने गुप्त रूप से गौरी को समाचार दिया कि पृथ्वीराज के प्रमुख सामन्त अब नहीं रहे, यही मौका है। तब भी गौरी को विश्वास नहीं हुआ, उसने अपने दूत फकीरों के भेष में दिल्ली भेजे। ये लोग इन्हीं लोगों के पास गुप्त रूप से रहे थे। इन्होंने जाकर गौरी को सूचना दी, तब जाकर गौरी ने पृथ्वीराज पर आक्रमण किया था। गौरी को भेद देने वाले थे नित्यानन्द खत्री, प्रतापसिंह जैन, माधोभट्ट तथा धर्मायन कायस्थ जो तेंवरों के कवि (बंदीजन) और अधिकारी थे (पृथ्वीराज रासो-उदयपुर संस्करण)। समकालीन इतिहास में कही भी जयचन्द के बारे में उल्लेख नहीं है कि उसने गौरी की सहायता की हो। यह सब आधुनिक इतिहास में कपोल कल्पित बातें हैं। जयचन्द का पृथ्वीराज से कोई वैमनस्य नहीं था। संयोगिता प्रकरण से जरूर वह थोड़ा कुपित हुआ था। उस समय पृथ्वीराज, जयचन्द की कृपा से ही बचा था। संयोगिता हरण के समय जयचन्द ने अपनी सेना को आज्ञा दी थी कि इनको घेर लिया जाए। लगातार पाँच दिन तक पृथ्वीराज को दबाते रहे। पृथ्वीराज के प्रमुखप्रमुख सामन्त युद्ध में काम आ गए थे। पाँचवे दिन सेना ने घेरा और कड़ा कर दिया। जयचन्द आगे बढ़ा वह देखता है कि पृथ्वीराज के पीछे घोड़े पर संयोगिता बैठी है। उसने विचार किया कि संयोगिता ने पृथ्वीराज का वरण किया है। अगर मैं इसे मार देता हूँ तो बड़ा अनर्थ होगा, बेटी विधवा हो जाएगी। उसने सेना को घेरा तोड़ने का आदेश दिया, तब कहीं जाकर पृथ्वीराज दिल्ली पहुँचा। फिर जयचन्द ने अपने पुरोहित दिल्ली भेजे, जहाँ विधि-विधान से पृथ्वीराज और संयोगिता का विवाह सम्पन्न हुआ। पृथ्वीराज और गौरी के युद्ध में जयचन्द तटस्थ रहा था। इस युद्ध में पृथ्वीराज ने उससे सहायता भी नहीं माँगी थी। पहले युद्ध में भी सहायता नहीं माँगी थी। अगर पृथ्वीराज सहायता माँगता तो जयचन्द सहायता जरूर कर सकता था। अगर जयचन्द और गौरी में मित्रता होती तो बाद में गौरी जयचन्द पर आक्रमण क्यों करता ? अतः यह आरोप मिथ्या है। पृथ्वीराज रासो में यह बात कहीं नहीं कही गई कि जयचन्द ने गौरी को बुलाया था। इसी प्रकार समकालीन फारसी ग्रन्थों में भी इस बात का संकेत तक नहीं है कि जयचन्द ने गौरी को आमन्त्रित किया था। यह एक सुनी-सुनाई बात है जो एक रूढी बन गई है।

      Reply
      1. vinu bhoye says:
        July 5, 2017 at 3:42 pm

        Awesome love story!!!!

        Reply
      2. REKHA KASHYAP says:
        June 26, 2020 at 7:14 am

        MUJHE YRE SERAIL SBSE ACHJA LGTA H

        Reply
      3. rekha kashyap says:
        June 26, 2020 at 7:16 am

        rajaty and mugdha my fovert h prithi me sbse jyada I love u so mucg

        Reply
      4. REKHA KASHYAP says:
        June 26, 2020 at 7:17 am

        plz mera ye msg rajat b tk pahucha dena plz

        Reply
      5. REKHA KASHYAP says:
        June 26, 2020 at 7:17 am

        I love you rajat and mugdha

        Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Daily Horoscope

04/22/26

Pages

  • AdTest
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Guest Post & Sponsored Post
  • Privacy Policy
©2026 Ajab Gajab | Design: Newspaperly WordPress Theme