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चाणक्य नीति- किसी को नींद से जगाते समय ध्यान रखें ये बातें

Posted on April 20, 2015August 22, 2016 by Pankaj Goyal

आचार्य चाणक्य ने हर परिस्थिति के लिए अलग-अलग नीतियां बताई हैं। यदि हमारे आसपास कोई व्यक्ति सो रहा है तो उसे जगाने से पहले चाणक्य की इस नीति का ध्यान एक बार कर लेंगे तो आप कई समस्याओं से बच सकते हैं।
Chanakya Niti about sleeping person
आचार्य ने 7 प्राणी ऐसे बताए हैं, जिन्हें नींद से जगाना नहीं चाहिए…

1. मूर्ख व्यक्ति

यदि कोई मूर्ख व्यक्ति सो रहा है तो उसे सोने देना चाहिए। जगाने का प्रयास भी नहीं करना चाहिए। यदि मूर्ख व्यक्ति जाग जाएगा तो हमारे लिए परेशानियां बढ़ सकती हैं। बुद्धिहीन व्यक्ति बेकार की बातों से हमारा समय नष्ट करता है और वे कभी-कभी बिना विचारे ही ऐसे काम देते हैं, जिनसे हमें किसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अत: इन्हें जगाना नहीं चाहिए। जब तक ये सोते रहेंगे, हम सुखी रहेंगे।

2. सांप

यदि कहीं कोई सांप सो रहा हो तो उसे छेड़ना नहीं चाहिए। सभी जानते हैं कि सांप को छेड़ने पर मृत्यु का संकट उत्पन्न हो सकता है। अत: सोते हुए सांप को बिना छेड़े ही वहां से निकल जाना चाहिए।

3. राजा या मालिक

यदि कोई राजा या बड़ा अधिकारी, मंत्री या कोई वरिष्ठ सो रहा हो तो उसे जगाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों को जगाने पर वे नाराज हो सकते हैं। पुराने समय में तो राजा को अकारण जगाना भयंकर अपराध माना जाता था, इस अपराध का दंड बहुत भयानक होता था।

4. शेर

यदि कहीं सोता हुआ शेर दिखाई दे तो उसे भी छेड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए। शेर इंसानों को देखते ही झपट पड़ते हैं। अत: सोते हुए शेर को जगाए बिना ही वहां से निकल जाना चाहिए।

5. छोटा बच्चा

यदि कोई छोटा बच्चा सो रहा हो तो उसे भी जगाना नहीं चाहिए। छोटे बच्चे जागने के तुरंत बाद रोते हैं, जिन्हें चुप कराना सिर्फ उनकी मां के लिए ही संभव है। अन्य कोई व्यक्ति रोते हुए बच्चे को आसानी से शांत नहीं करवा सकता है। छोटे बच्चे के लिए सोना बहुत जरूरी होता है, अत: उसके स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उसे जगाना नहीं चाहिए।

6. पराया कुत्ता

यदि हम किसी व्यक्ति के घर गए हैं और वहां कोई कुत्ता है तो उसे छेड़ना नहीं चाहिए। यदि वह सो रहा है तो उसे सोने ही दें, क्योंकि कुत्ते अजनबी लोगों को देखकर काटने का प्रयास करते हैं।

7. कोई हिंसक पशु

यदि किसी स्थान पर कोई हिंसक पशु सो रहा है तो उसे भी छेड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए। हिंसक पशु कभी भी इंसान पर हमला कर सकता है, जिसे संभाल पाना बहुत मुश्किल होता है।

इन 6 लोगों को नींद से तुरंत जगा देना चाहिए…

1. विद्यार्थी

आचार्य चाणक्य ने बताया है कि किसी भी व्यक्ति के जीवन शिक्षा का बहुत अधिक महत्व है। इसी वजह से शिक्षा ग्रहण करते समय अधिक से अधिक समय अभ्यास ही करना चाहिए। अत: यदि कोई विद्यार्थी परीक्षा के समय सो रहा है तो उसे तुरंत उठा देना चाहिए ताकि वह अभ्यास ठीक से कर सके। विद्यार्थी सोता रहेगा तो वह परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो सकता है।

2. नौकर

चाणक्य के अनुसार यदि कोई नौकर काम के समय सो रहा हो तो उसे तुरंत जगा देना चाहिए, अन्यथा कार्य पूर्ण नहीं हो सकेगा।

3. राहगीर

यदि कोई राहगीर या यात्री रास्ते में सोता दिखाई दे तो उसे भी उठा देना चाहिए, अन्यथा उसका सामान चोरी होने का भय रहता है। यात्री को सोता देख कोई चोर उसके धन को चुरा सकता है या अन्य कोई हानि पहुंचा सकता है। यात्री सोता रहेगा तो वह अपनी यात्रा पूर्ण नहीं कर सकेगा।

4. भूखा व्यक्ति

यदि कोई व्यक्ति भूखा है तो उसे जगा देना चाहिए और उसे भोजन देना चाहिए। भूखा व्यक्ति सोता रहेगा तो उसे शारीरिक कष्ट झेलना पड़ सकते हैं, वह बीमार हो सकता है।

5. डरा हुआ व्यक्ति

यदि कोई व्यक्ति नींद में डर रहा है तो उसे भी तुरंत उठा देना चाहिए ताकि उसका भयानक सपना टूट जाए और उसे शांति मिले।

6. चौकीदार

किसी भण्डार गृह का रक्षक या कोई चौकीदार अपने कर्तव्य के समय सोते दिखे तो इन्हें भी तुरंत जगा देना चाहिए। भण्डार गृह का रक्षक या चौकीदार के सोने पर चोरी होने का भय बना रहता है। साथ ही, जन हानि होने की भी संभावनाएं रहती हैं।

आचार्य चाणक्य का संक्षिप्त परिचय

भारत के इतिहास में आचार्य चाणक्य का महत्वपूर्ण स्थान है। एक समय जब भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और विदेशी शासक सिकंदर भारत पर आक्रमण करने के लिए सीमा तक आ पहुंचा था, तब चाणक्य ने अपनी नीतियों से भारत की रक्षा की थी। चाणक्य ने अपने प्रयासों और अपनी नीतियों के बल पर एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को भारत का सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य बना दिया और अखंड भारत का निर्माण किया।

चाणक्य के काल में पाटलीपुत्र (वर्तमान में पटना) बहुत शक्तिशाली राज्य मगध की राजधानी था। उस समय नंदवंश का साम्राज्य था और राजा था धनानंद। कुछ लोग इस राजा का नाम महानंद भी बताते हैं। एक बार महानंद ने भरी सभा में चाणक्य का अपमान किया था और इसी अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए आचार्य ने चंद्रगुप्त को युद्धकला में पारंगत किया। चंद्रगुप्त की मदद से चाणक्य ने मगध पर आक्रमण किया और महानंद को पराजित किया।

आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। जो भी व्यक्ति इन नीतियों का पालन करता है, उसे जीवन में सभी सुख-सुविधाएं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

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