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चाणक्य नीति- हमें उस जगह रहना चाहिए जहां हों ये पांच बातें

Posted on April 14, 2015August 23, 2016 by Pankaj Goyal

Chanakya Neeti- Where we should live? : हमें कैसे स्थान को अपना निवास, घर बनाना चाहिए इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने 5 बातें बताई हैं। जिस स्थान पर ये बातें उपलब्ध हों, वहां रहना सर्वश्रेष्ठ है।

Hindi Chanakya Neeti- Where we should live?

आचार्य चाणक्य कहते हैं-

धनिक: श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पंचम:।
पंच यत्र न विद्यन्ते तत्र दिवसं वसेत्।।

प्रथम स्थान जहाँ कोई धनी रहता हो

आचार्य चाणक्य ने रहने योग्य प्रथम स्थान वह बताया है जहाँ कोई धनी रहता हो, क्योंकि जिस स्थान कोई धनी हो, वहां व्यवसाय में बढ़ोतरी होती है। धनी व्यक्ति के आसपास रहने वाले लोगों को भी रोजगार प्राप्त होने की संभावनाएं रहती है।

दूसरा स्थान वह जहाँ कोई ज्ञानी रहता हो

आचार्य चाणक्य ने रहने योग्य दूसरा स्थान वह बताया है जहाँ कोई ज्ञानी रहता हो, क्योंकिजिस स्थान पर कोई ज्ञानी, वेद जानने वाला व्यक्ति हो, वहां रहने से धर्म लाभ प्राप्त होता है। हमारा ध्यान पाप की ओर नहीं बढ़ता है।

तीसरा स्थान वह जहाँ कोई शासकीय अधिकारी रहता हो

आचार्य चाणक्य ने रहने योग्य तीसरा स्थान वह बताया है जहाँ कोई शासकीय अधिकारी रहता हो, क्योंकि जहां राजा या शासकीय व्यवस्था से संबंधित व्यक्ति रहता है, वहां रहने से हमें सभी शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त होता है।

चौथा स्थान वह जहाँ नदी बहती हो

आचार्य चाणक्य ने रहने योग्य चौथा स्थान वह बताया है जहाँ आस पास कोई नदी  बहती हो, क्योंकि जिस स्थान पर नदी बहती हो, जहां पानी प्रचूर मात्रा में वहां रहने से हमें समस्त प्राकृतिक वस्तुएं और लाभ प्राप्त होते हैं।

पांचवा स्थान वह जहाँ वैद्य रहता हो

आचार्य चाणक्य ने रहने योग्य पांचवा स्थान वह बताया है जहाँ कोई वैद्य रहता हो, क्योंकि जिस स्थान पर वैद्य हो, वहां रहने से हमें बीमारियों से तुरंत मुक्ति मिल जाती है।

अत: आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई ये पांच बातें जहां हो, वहां रहना ही लाभकारी रहता है।

आचार्य चाणक्य का परिचय

प्राचीन समय में आचार्य चाणक्य तक्षशिला के गुरुकुल में अर्थशास्त्र के आचार्य थे। चाणक्य की राजनीति में गहरी पकड़ थी। इनके पिता का नाम आचार्य चणीक था, इसी वजह से इन्हें चणी पुत्र चाणक्य भी कहा जाता है। संभवत: पहली बार कूटनीति का प्रयोग आचार्य चाणक्य द्वारा ही किया गया था। जब इन्होंने अपनी कूटनीति के बल पर सम्राट सिकंदर को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके अतिरिक्त कूटनीति से ही इन्होंने चंद्रगुप्त जैसे सामान्य बालक को अखंड भारत का सम्राट भी बनाया। आचार्य चाणक्य द्वारा श्रेष्ठ जीवन के लिए चाणक्य नीति ग्रंथ रचा गया है। इसमें दी गई नीतियों का पालन करने पर जीवन में सफलताएं प्राप्त होती हैं।

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