Ajab Gajab

Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion, Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts

Menu
  • Pauranik Katha
  • Jyotish
  • Quotes
  • Shayari
  • Amazing India
  • Self Improvment
  • Health
  • Temple
  • Bizarre
Menu

चाणक्य नीति- किसी का भी स्वभाव हंस के जैसा नहीं होना चाहिए

Posted on May 29, 2015August 13, 2016 by Pankaj Goyal

घर-परिवार और समाज में हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए, हमें अन्य लोगों के साथ कैसे रहना चाहिए, हमारा रिश्ता कैसा हो? इस संबंध आचार्य चाणक्य ने कुछ नीतियां बताई है।

Chanakya Neeti for human behavior

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि-

यत्रोदकस्तत्र वसन्ति हंसा
स्तथैव शुष्कं परिवर्जयन्ति।

न हंसतुल्येन नरेण भाव्यं
पुनस्त्यजन्त: पुनराश्रयन्त:।।

जिस स्थान पर जल रहता है हंस वही रहते हैं। हंस उस स्थान को तुरंत ही छोड़ देते हैं जहां पानी नहीं होता है। हमें हंसों के समान स्वभाव वाला नहीं होना चाहिए।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हमें कभी भी अपने मित्रों और रिश्तेदारों का साथ नहीं छोडऩा चाहिए। जिस प्रकार हंस सूखे तालाब को तुरंत छोड़ देते हैं, इंसान का स्वभाव वैसा नहीं होना चाहिए। यदि तालाब में पानी न हो तो हंस उस स्थान को भी तुरंत छोड़ देते हैं जहां वे वर्षों से रह रहे हैं। बारिश के बाद तालाब में जल भरने के बाद हंस वापस उस स्थान पर आ जाते हैं। हमें इस प्रकार का स्वभाव नहीं रखना चाहिए। हमारे मित्रों और रिश्तेदारों का सुख-दुख हर परिस्थिति में साथ नहीं छोडऩा चाहिए। एक बार जिससे संबंध बनाया जाए उससे हमेशा निभाना चाहिए। हंस के समान स्वार्थी स्वभाव नहीं होना चाहिए।

कौन थे आचार्य चाणक्य

भारत के इतिहास में आचार्य चाणक्य का महत्वपूर्ण स्थान है। एक समय जब भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और विदेशी शासक सिकंदर भारत पर आक्रमण करने के लिए भारतीय सीमा तक आ पहुंचा था, तब चाणक्य ने अपनी नीतियों से भारत की रक्षा की थी। चाणक्य ने अपने प्रयासों और अपनी नीतियों के बल पर एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को भारत का सम्राट बनाया जो आगे चलकर चंद्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुए और अखंड भारत का निर्माण किया।

चाणक्य के काल में पाटलीपुत्र (वर्तमान में पटना) बहुत शक्तिशाली राज्य मगध की राजधानी था। उस समय नंदवंश का साम्राज्य था और राजा था धनानंद। कुछ लोग इस राजा का नाम महानंद भी बताते हैं। एक बार महानंद ने भरी सभा में चाणक्य का अपमान किया था और इसी अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए आचार्य ने चंद्रगुप्त को युद्धकला में पारंपत किया। चंद्रगुप्त की मदद से चाणक्य ने मगध पर आक्रमण किया और महानंद को पराजित किया।

आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। जो भी व्यक्ति नीतियों का पालन करता है, उसे जीवन में सभी सुख-सुविधाएं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

Other Similar Posts-

  • सम्पूर्ण चाणक्य नीति
  • चाणक्य नीति: इन 5 के बीच में से कभी नहीं निकलना चाहिए
  • चाणक्य नीति: सफल होने के लिए मालूम होने चाहिए इन 6 प्रश्नों के उत्तर
  • चाणक्य नीति: जब हो जाए ऐसी 4 बातें तो तुरंत भाग जाना चाहिए
  • चाणक्य नीति- जानिए किसी व्यक्ति के गलत कामो का फल किस-किस इंसान को भुगतना पड़ता है

Related posts:

चाणक्य नीति - अगर आप में ये 4 बातें हैं तो बन सकते हैं अच्छा लीडर और सफल इंसान
चाणक्य नीति के अनुसार सफलता पाने के लिए ये 3 काम जरूर करने चाहिए
जरूर पढ़े ज़िन्दगी को बदलने वाली ये पुस्तकें
विदुर नीति - इन 3 तरीको से कमाया गया धन नहीं टिकता
चाणक्य नीति : इन तीन प्रकार के लोगों से रहे दूर, ना करें मदद
चाणक्य के अनुसार जो करते है ये 6 काम वहां नहीं टिकती लक्ष्मी
विदुर नीति - स्त्री, अन्न, योद्धा और तपस्वी की प्रशंसा कब करनी चाहिए
आचार्य चाणक्य की सम्पूर्ण कहानी
चाणक्य नीति: इन तीन लोगों से हमेशा सावधान रहना चाहिए
चाणक्य नीति - इन तीन प्रकार के लोगों से व्यवहार करने पर हमेशा दुःख ही प्राप्त होता है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Daily Horoscope

05/01/26

Pages

  • AdTest
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Guest Post & Sponsored Post
  • Privacy Policy
©2026 Ajab Gajab | Design: Newspaperly WordPress Theme