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बाबा तामेश्वरनाथ धाम (Baba Tameshwar Nath Dham)- इस शिवलिंग की कुंती ने की थी सबसे पहले पूजा

Posted on August 16, 2015July 27, 2016 by Pankaj Goyal

Baba Tameshwar Nath Dham Temple Khalilabad Gorakhpur Story in Hindi : आज हम आपको एक ऐसे प्राचीन मंदिर के बारे में बताने जा रहा है, जहां पर पांडवों की माता कुंती ने सबसे पहले पूजा की थी। गोरखपुर से 60 किमी दूर संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद में बाबा तामेश्वरनाथ का धाम बसा है। मान्यता है कि जंगल के बीच बसा ये मंदिर सभी की मनोकामनाएं पूरी करता है। बाबा के दर्शन मात्र से ही भक्तों के दुख दूर हो जाते हैं। कहा जाता है कि भगवान के इस जगह पर उत्पत्ति के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है।

Baba Tameshwar Nath Dham Temple Khalilabad Story in Hindi
बाबा तामेश्वरनाथ शिवलिंग
कुंती ने की थी सबसे पहले शिवलिंग की पूजा

द्वापर युग में पांडवों को लाक्षागृह में जलाकर मारने की कोशिश नाकामयाब हो गई थी। पांडव अपना अज्ञातवास पूरा करने के लिए विराटनगर जा रहे थे। तभी यहां पर आकर उन्‍होंने आराम किया था। पांडवों की मां कुंती महादेव की भक्त थीं। उन्होंने यहां पर प्राकृतिक रूप से निकले शिवलिंग की पूजा की और बेटों के लिए प्रार्थना की। तभी से यहां पर भगवान तामेश्वर की पूजा-अर्चना की जाती है, जो आज भी जारी है।

Baba Tameshwar Nath Dham Temple Khalilabad Story in Hindi
मंदिर में मौजूद अन्य भगवान की मूर्तियां
मुस्लिम शासक ने की मंदिर नष्ट करने की कोशिश

स्थानीय निवासी रामेश्वर ने बताया कि खलीलाबाद के मुस्लिम शासक खलीलुरहमान ने इस मंदिर को नष्ट करने और यहां से हटाने की काफी कोशिश की, लेकिन वो सफल नहीं हो सका। थक-हारकर उसने शिवलिंग के आगे हाथ जोड़े और वहां से चला गया। इसके बाद एक राजा द्वारा इस मंदिर का पूरी तरह से निर्माण कराया गया।

Baba Tameshwar Nath Dham Tempel Khalilabad Story in Hindi
मुराद मांगते शिवभक्त
ऐसे पड़ा तामेश्वरनाथ धाम का नाम

दिर के पुजारी शिवदत्त भारती ‘गोस्वामी’ ने बताया कि भगवान शिव का नाम तामेश्वर इसलिए पड़ा, क्योंकि आदिकाल में ये नगर ताम्रगढ़ के नाम से जाना जाता था। औरंगजेब के शासनकाल में जब हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाने लगा तो लोग यहां से भागकर नेपाल चले गए। जो बच गए, वे बाबा की शरण में आ गए। इसके बाद शिवजी ने उनकी रक्षा की। इसी वजह से उन्हें तामेश्वरनाथ के नाम से जाना जाने लगा।

सरयू नदी से जल लेकर करते हैं जलाभिषेक

शिवभक्त अंबिका नाथ ने कहा कि सावन के महीने में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। श्रद्धालु 40 किमी दूर सरयू नदी से जल लेते हैं और सोमवार को ब्रह्ममुहूर्त में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। कहते हैं कि भोलेनाथ के दर्शन मात्र से भक्तों की मुराद पूरी हो जाती है। लोग यहां पर घंटे चढ़ाते हैं और रामायण पाठ भी कराते हैं। सावन में दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन करने आते हैं।

Baba Tameshwar Nath Dham Tempel Khalilabad Story in Hindi
मंदिर में मुराद पूरी होने के बाद भक्त चढ़ाते हैं घंटे
नई फसल दान करते हैं ग्रामीण

पुजारी शरदचंद्र ने बताया कि शिव के तामेश्वरधाम को यहां के लोग अपना प्रमुख धार्मिक स्थल मानते हैं। जिसके घर में नई फसल पैदा होती है, वो अपनी फसल का आधा भाग यहां लाकर दान करता है। इसी दान से मंदिर के साधुओं और ब्राह्मणों का खर्च चलता है। भगवान तामेश्वर के बारे में कहा जाता है कि यदि कहीं पर अकाल या सूखा पड़ता है तो लोग शिवलिंग पर दूध चढ़ाते हैं। इसके बाद बाबा की कृपा से भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं।

Baba Tameshwar Nath Dham Tempel Khalilabad Story in Hindi
सरोवर में भक्त करते हैं स्नान
सरोवर में स्नान करने बाद करते हैं बाबा के दर्शन

इस मंदिर के पास करीब एक दर्जन शिव मंदिर हैं। साथ ही परिसर के पास विशाल सरोवर भी है। इसमें स्नान करने के बाद ही भक्त बाबा के दर्शन करने जाते हैं। वहीं, सावन, शिवरात्रि और नागपंचमी के मौके पर यहां काफी तादाद में शिवभक्त आते हैं। भारत के अलावा नेपाल और दूरदराज से भी लोग यहां आकर बाबा के दर्शन कर आर्शीवाद लेते हैं।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े – भारत के अदभुत मंदिर
पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह
भगवान शिव के अन्य चमत्कारिक लेख
  • यह भी पढ़े- शलमाला नदी में एक साथ बने है हज़ारों शिवलिंग, नदी की धारा स्वयं करती है अभिषेक
  • लिंगाई माता मंदिर – स्त्री रूप में होती है शिवलिंग की पूजा
  • अचलेश्वर महादेव – धौलपुर(राजस्थान) – यहाँ पर है दिन मे तीन बार रंग बदलने वाला शिवलिंग
  • महादेवशाल धाम – जहाँ होती है खंडित शिवलिंग की पूजा – गई थी एक ब्रिटिश इंजीनियर की जान
  • अनोखा शिवलिंग – महमूद गजनवी ने इस पर खुदवाया था कलमा 

Tag- HIndi, Story, Kahani, History, Baba Tameshwar Nath Dham, Khalilabad, Uttar Pradesh,

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