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अट्ठाईसवें कलियुग में काल का प्रभाव

Posted on November 22, 2016April 5, 2018 by Pankaj Goyal

|| एक भविष्य वाणी ||
|ॐ| डा.अजय दीक्षित |ॐ|

Kalyug me kaal ka prabhav

१:- तमोगुणी वाले मनुष्य तपस्वी महत्माओं की हत्या करेंगे ।

२ :-सदा भुखमरी का भय सताता रहेगा ।

३:- भयंकर अनावृष्टि का भय रहेगा ।

४:-सब देशों में नाना प्रकार के उलटफेर होते रहेंगे ।

५:-सदा अधर्म-सेवन के कारण मनुष्यों के लिए वेद का प्रमाण मान्य नही होगा ।

६:-मनुष्य अधार्मिक,अनाचारी,क्रोधी तथा तेजहीन होंगे ।

७:-मनुष्य लोभ के वशीभूत होकर झूँठ बोलेंगे और उनमें अधिकांश नारियों का स्वाभाव आ जायेगा ।

८:-चोर राजाओं की वृत्ति में स्थित होंगे ।

९:-राजा चोरों के समान वर्ताव करेंगे ।

१०:-कुल्टा नारियों की संख्या बढेगी ।

११:-राजा लोग निडर होकर पाप करेंगे ।

१२:-रक्षक ही प्रजा की सम्पत्ति हडप लेंगे ।

१३:-म्लेच्छ वाद-विवाद करेंगे ।

१४:-सतपुरूष के सामने -म्लेच्छ ऊँचे आसन पर बैठेंगे और वेदवाक्यों तथा वेदार्थों की निन्दा करेंगे ।

१५:-बेधर्मी स्वयं अपना ग्रन्थ रचेंगे वही प्रमाण माना जयेगा

१६:-हिसंक जीव प्रबल होंगे, गो वंश का क्षय होगा ।

१७:-प्राय:सभी लोग वाणिज्य-वृत्ति करने वाले होंगे ।

१८:-अधिकतर मनुष्य परायाधन हडपने वाले,परस्त्रियों का सतीत्व नष्ट करने वाले होंगे ।

१९:-चोर के घर में चोरी होगी,ज्ञान और कर्म दोनों का आभाव होगा ।

एक नजर कलियुग पे :——–

१:-तीन हजार दो सौ नब्बे वर्ष व्यातीत होने पर शूद्रक नाम वाला राजा हुआ जिसने म्लेच्छों का संघार करके धर्म की स्थापना की ।

२:-तीन हजार तीन सौ दसवें वर्ष चाण्क्य नाम का ब्राह्मण हुआ जिसने नंद वंश का संघार करके धर्म की स्थापना की ।

३:-कलियुग के तीन हजार तीन सौ बीस वर्ष व्यातीत होने पर विक्रमादित्य नाम का राजा हुआ जिसने नवदुर्गाओं की कृपा से म्लेच्छों का संघार करके धर्म की स्थापना की ।

४:-कलियुग के तीन हजार छ: सौ वर्ष व्यातीत होने पर मगध देश में,हेमसदन से अन्जनी के गर्भ से भगवान विष्णु के अंशा अवतार  स्वयं भगवान बुद्ध का अवतरण हुआ। जिन्हें ने धर्म की स्थापना की ।

५:-चार हजार चार सौ वर्ष व्यातीत होने पर चन्द्रवंश में महराज प्रमिति का प्रादुर्भाव हुआ । करोडों म्लेच्छों का बध करके धर्म की स्थापना की ।

आचार्य, डा.अजय दीक्षित

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