Ajab Gajab

Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion, Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts

Menu
  • Pauranik Katha
  • Jyotish
  • Quotes
  • Shayari
  • Amazing India
  • Self Improvment
  • Health
  • Temple
  • Bizarre
Menu

प्रभु यीशु (ईसा मसीह) के जीवन से जुडी 4 प्रमुख घटनाएं

Posted on December 25, 2016 by Pankaj Goyal

4 Most Important Events In Jesus’ Life In Hindi : मान्यता है कि प्रभु यीशु (ईसा मसीह) ने ही ईसाई धर्म की स्थापना की। ईसाई धर्म के प्रमुख ग्रंथों बाइबिल और न्यू टेस्टामेंट के आधार पर ईसा मसीह के जीवन की जानकारी प्राप्त होती है। आज हम आपको प्रभु यीशु के जीवन से जुडी 4 प्रमुख घटनाओं के बारे में बता रहे हैं-

यह भी पढ़े–  जीसस क्राइस्ट के अनमोल विचार

4 Most Important Events In Jesus' Life In Hindi

कुंवारी लड़की के गर्भ से हुआ था यीशु का जन्म
ईसाई धर्म के अनुसार प्रभु यीशु का जन्म बेतलेहम (जोर्डन) में कुँवारी मरियम (वर्जिन मरियम) के गर्भ से हुआ था। उनके पिता का नाम युसुफ था, जो पेशे से बढ़ई थे। स्वयं ईसा मसीह ने भी 30 वर्ष की आयु तक अपना पारिवारिक बढ़ई का व्यवसाय किया। पूरा समाज उनकी ईमानदारी और सद्व्यवहार, सभ्यता से प्रभावित था। सभी उन पर भरोसा करते थे।

यीशु ने लोगों को क्षमा, शांति, दया, करूणा, परोपकार, अहिंसा, सद्व्यवहार एवं पवित्र आचरण का उपदेश दिया। उनके इन्हीं सद्गुणों के कारण लोग उन्हें शांति दूत, क्षमा मूर्ति और महात्मा कहकर पुकारने लगे। यीशु की दिनो-दिन बढ़ती ख्याति से तत्कालीन राजसत्ता ईर्ष्या करने लगी और उन्हें प्रताड़ित करने की योजनाएं बनाने लगी।

विद्वान यूहन्ना से दीक्षा ली थी यीशु ने
यहूदी विद्वान यूहन्ना से भेंट होना यीशु के जीवन की महत्वपूर्ण घटना थी। यूहन्ना जोर्डन नदी के तट पर रहते थे। यीशु ने सर्वप्रथम जोर्डन नदी का जल ग्रहण किया और फिर यूहन्ना से दीक्षा ली। यही दीक्षा के पश्चात ही उनका आध्यात्मिक जीवन शुरू हुआ। अपने सुधारवादी एवं क्रांतिकारी विचारों के कारण यूहन्ना के कैद हो जाने के बाद बहुत समय तक ईसा मृत सागर और जोर्डन नदी के आस-पास के क्षेत्रों में उपदेश देते रहे।

स्वर्ग के राज्य की कल्पना एवं मान्यता यहूदियों में पहले से ही थी। किंतु यीशु ने उसे एक नए और सहज रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत किया। यीशु ने कहा कि संसार में पाप का राज्य हो रहा है। भले लोगों के लिए रोने-धोने के अलावा इस संसार में और कुछ नहीं है। पाप का घड़ा भर गया है। वह फूटने ही वाला है। इसके बाद ही ईश्वर के राज्य की बारी है। यह राज्य एक आकस्मिक घटना की भांति उदित होगा। और मानवता को पुनर्जीवन प्राप्त होगा।

यीशु के शिष्य ने ही किया था विश्वासघात
यीशु बड़े वैज्ञानिक तरीके से लोगों को उपदेश देते थे। अज्ञानी, अनपढ़ तथा सीधे-सादे लोगों को वे छोटी-मोटी कथाओं के माध्यम से प्रेम, दया, क्षमा और भाईचारे का पाठ पढ़ाते। उन्होंने लोगों को समझाते हुए सदैव यही कहा कि तुझे केवल प्रेम करने का अधिकार है। पड़ोसी को अपने समान ही समझो और चाहो। स्वार्थ भावना का त्याग करो।

अंतिम भोज के नाम से प्रसिद्ध घटना के समय भोजन के बाद वे अपने तीन शिष्यों पतरत, याकूब और सोहन के साथ जैतन पहाड़ के गेथ रोमनी बाग में गए। मन की बेचैनी बढ़ते देख वे उन्हें छोड़कर एकांत में चले गए तथा एक खुरदुरी चट्टान पर मुंह के बल गिरकर प्रार्थना करने लगे। उन्होंने प्रार्थना में ईश्वर से कहा दुख उठाना और मरना मनुष्य के लिए दुखदायी है किंतु हे पिता यदि तेरी यही इच्छा हो तो ऐसा ही हो।

लौटकर उन्होंने अपने शिष्यों से कहा वह समय आ गया है जब एक विश्वासघाती मुझे शत्रुओं के हाथों सौंप देगा। इतना कहना था कि यीशु का एक शिष्य उनकी गिरफ्तारी के लिए सशस्त्र सिपाहियों के साथ आता दिखाई दिया। जैसा कि ईसा मसीह ने पहले की कह दिया था उनको गिरफ्तार कर लिया गया। न्यायालय में उन पर कई झूठे दोष लगाए गए। यहां तक की उन पर ईश्वर की निंदा करने का आरोप लगाकर उन्हें प्राणदंड देने के लिए जोर दिया गया।

मृत्यु के तीन दिन बाद पुनर्जीवित हो गए थे यीशु
यीशु के शिष्य ने विश्वासघाती होने के कारण आत्महत्या कर ली। सुबह होते ही यीशु को अंतिम निर्णय के लिए न्यायालय भेजा गया। न्यायालय के बाहर शत्रुओं ने लोगों की भीड़ एकत्रित की और उनसे कहा कि वे पुकार-पुकार कर यीशु को प्राणदंड देने की मांग करें। ठीक ऐसा ही हुआ। न्यायाधीश ने लोगों से पूछा इसने क्या अपराध किया है? मुझे तो इसमें कोई दोष नजर नहीं आ रहा है।

किंतु गुमराह किए हुए लोगों ने कहा कि यीशु को सूली दो। अंतत: उन्हें सूली पर लटका कर कीलों से ठोक दिया गया। हाथ व पैरों में ठुकी कीले आग की तरह जल रही थीं। ऐसी अवस्था में भी ईसा मसीह ने परमेश्वर को याद करते हुए प्रार्थना की कि हे मेरे ईश्वर तूने मुझे क्यों अकेला छोड़ दिया? इन्हें माफ करना क्योंकि ये नहीं जानते ये क्या कर रहे हैं।

कुछ घंटों उनका दिव्य शरीर क्रूस पर झूलता रहा। अंत में उनका सिर नीचे की ओर लटक गया और इस तरह आत्मा ने शरीर से विदा ले ली। मृत्यु के तीसरे दिन एक दैवीय चमत्कार हुआ और यीशु पुन: जीवित हो उठे। मृत्यु के उपरांत पुन: जीवित हो जाना उनकी दिव्य शक्तियों एवं क्षमताओं का प्रतीक था।

अन्य सम्बंधित लेख- 

  • जानिए क्रिसमस से जुडी परम्पराएं – कौन है सांता, क्यों सजाते है क्रिसमस ट्री
  • दुनिया के 8 सबसे खूबसूरत चर्च
  • इमाम हुसैन और कर्बला का युद्ध: जानिए कब और कैसे शहीद हुए थे इमाम हुसैन
  • चमकौर का युद्ध –  जहां 10 लाख मुग़ल सैनिकों पर भारी पड़े थे 40 सिक्ख
  • कहानी राजा भरथरी (भर्तृहरि) की – पत्नी के धोखे से आहत होकर बन गए तपस्वी

Related posts:

चैत्र नवरात्रि 2023 - माँ दुर्गा का नाव पर होगा आगमन और मनुष्य पर होंगी विदा
शरीर का सार - आचार्य डा.अजय दीक्षित "अजय"
जानिये किन 6 देवों की पूजा होती है धनतेरस के दिन
नवरात्रि 2021 कलश स्थापना मुहूर्त | जानिये नवरात्रि में क्यों उगाई जाती है जौ और क्या है इस से जुड़े ...
श्री हनुमान चालीसा का भावार्थ | Hanuman Chalisa Ka Bhavarth
श्री गुरु अर्जुन देव जी Shri Guru Arjun Dev Ji
राम नवमी | Ram Navami
जानिए, रामायण हमारे शरीर में हर समय होती है घटित
स्कंद षष्ठी व्रत एवं पूजन विधि | महत्व | भगवान कार्तिकेय का जन्म कथा
वैदिक घड़ी क्या कहती है?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Daily Horoscope

05/07/26

Pages

  • AdTest
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Guest Post & Sponsored Post
  • Privacy Policy
©2026 Ajab Gajab | Design: Newspaperly WordPress Theme