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कैमरे में नज़र नहीं आते थे लाहिड़ी महाराज, जानिए कैसे खिंची गई इनकी एक मात्र फोटो

Posted on December 14, 2016December 15, 2016 by Pankaj Goyal

Lahiri Maharaj Story In Hindi :क्या ऐसा संभव है कि किसी ग्रुप फोटो में सभी लोग साफ नजर आएं, पर जिसके साथ फोटो खिंचवा रहे हो, वह नजर ही नहीं आए। जी हां ऐसा होता था परमहंस योगानंद के गुरु के गुरु लाहिड़ी महाराज के साथ। उनकी मर्जी के बिना उनका फोटो नहीं खींचा जा सका था।

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बात सुनने में जरूर अटपटी लगती है पर है बिलकुल सही। लाहिड़ी महाराज का जो फोटो उपलब्ध है, वह उनकी एकमात्र तस्वीर है। इसके पहले और बाद में उनकी कोई फोटो नहीं है। इस फोटो के पीछे भी बड़ी दिलचस्प कहानी है।

योगानंद के पूजा घर में रखा था फोटो
परमहंस योगानंद के जन्म के कुछ समय बाद ही लाहिड़ी महाराज दुनिया से विदा हो गए थे। लाहिड़ी महाराज ने उनके पिता भगवती चरण घोष को अपना एक फोटो दिया था, जो योगानंद के पूजा घर में रखा था। वह अपने माता-पिता को उसकी पूजा करते देखते थे।

तरह-तरह की होने लगी चर्चा
परमहंस योगानंद को इस फोटो की कहानी उनके पिता के गुरुभाई कालीकुमार राय ने सुनाई थी। उन्होंने बताया था की बड़े गुरुजी का पूरा नाम श्याम चरण लाहिड़ी था। उन्होंने योगानंद को बताया कि वह और लाहिड़ी महाराज के कुछ शिष्य उनके न चाहते हुए भी एक ग्रुप फोटो खींची। पर उस समय लोग हैरान रह गए जब फोटो बनकर आई। उसमें बाकी सभी लोग तो साफ-साफ नजर आ रहे थे, पर जिस जगह पर लाहिड़ी महाराज खड़े थे, वह जगह बिल्कुल खाली नजर आ रही थी। जैसे ही लोगों को इस बात की जानकारी लगी तरह-तरह की चर्चा होने लगी।

लाहिड़ी महाराज के पीछे लगा दिया एक पर्दा
उसी समय एक प्रसिद्ध फोटोग्राफर गंगाधर बाबू हुआ करते थे। जब ये बात उनको मालूम चली तो उन्होंने भी बड़े अभिमान से कहा- लाहिड़ी महाशय कुछ भी कर लें। वह उन्हें अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं। अगले दिन वह फोटो खींचने उनके घर पहुंच गए। लाहिड़ी महाराज पद्मासन में लकड़ी की बैंच पर ध्यान कर रहे थे। गंगाधर बाबू भी पूरी तैयारी से आए थे। उन्होंने फोटो खींचने से पहले लाहिड़ी महाराज के पीछे एक पर्दा लगा दिया। हर तरह की सावधानी और नियमों का पालन करते हुए उन्होंने लाहिड़ी महाराज के 12 फोटो खींचे।

लाहिड़ी महाराज ने उनसे कहा- ‘मैं ब्रह्मा हूं’
लेकिन थोड़ी देर बाद जब फोटो की प्लेट को गंगाधर बाबू ने देखा तो उनके होश उड़ गए। प्लेट पर लकड़ी की बैंच और पर्दे का फोटो तो साफ नजर आ रहा था। लेकिन लाहिड़ी महाराज कहीं नजर नहीं आ रहे थे। इस घटना के बाद गंगाधर बाबू रोते हुए लाहिड़ी महाराज के पास पहुंचे। ध्यान में बैठे लाहिड़ी महाराज ने उनसे कहा- ‘मैं ब्रह्मा हूं। क्या तुम्हारा कैमरा सर्वव्यापी अगोचर का फोटो खींच सकता है’?

फिर कभी नहीं खिंचवाई फोटो
इसपर गंगाधर बाबू ने कहा- ‘नहीं। परंतु आपके देह रूपी मंदिर की एक फोटो लेने की इच्छा है। मेरी दृष्टि बहुत संकुचित रही है, मैं यह नहीं समझ पाया कि आप में पूरी तरह से ब्रह्मा का वास है।’ इतना सुनने के बाद लाहिड़ी महाराज ने गंगाधर बाबू से कहा- ‘तुम कल सुबह आओ, मैं तुम्हारे कैमरे के सामने बैठकर फोटो खिंचवा लूंगा।’ दूसरे दिन गंगाधर बाबू फोटो लेने पहुंच गए। लाहिड़ी महाराज ने उन्हें अपना फोटो लेने दिया। इस फोटो के बाद लाहिड़ी महाराज ने कभी अपनी कोई फोटो नहीं खिंचवाई।

(श्याम चरण लाहिड़ीजी का जन्म 30 सितम्बर 1828 घुरनी ग्राम, बंगाल में हुआ था। 26 सितम्बर 1895 में उनका निधन हो गया था।)

स्रोत- योगी कथामृत

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