Ajab Gajab

Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion, Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts

Menu
  • Pauranik Katha
  • Jyotish
  • Quotes
  • Shayari
  • Amazing India
  • Self Improvment
  • Health
  • Temple
  • Bizarre
Menu

छत्रपति शिवाजी की गुरुसेवा – जब शिवा ने अपने गुरु के लिए निकाला शेरनी का दूध

Posted on February 21, 2017April 5, 2018 by Pankaj Goyal

Shivaji Samarth Guru Ramdas Hindi Story, Kahani | छत्रपति शिवाजी, समर्थ गुरु रामदास स्वामी के एकनिष्ठ भक्त थे। वे उन्हें सभी शिष्यों से अधिक प्रेम करते। शिष्यों को भावना हुई कि शिवाजी के राजा होने के कारण समर्थ उनसे अधिक प्रेम करते हैं। समर्थ ने तत्काल उनका संदेह दूर करने का उपाय किया।

यह भी पढ़े –  कथा धर्मग्रंथो में वर्णित 9 महान गुरुओं की

समर्थ शिष्यों के साथ जंगल में गये। सभी रास्ता भूल गये और समर्थ एक गुफा में जाकर उदरशूल का बहाना करके लेट गये।

इधर शिवाजी समर्थ के दर्शन के लिए निकले। उन्हें पता चला कि वे इस समय जंगल में कहीं हैं। खोजते-खोजते एक गुफा के पास आये। गुफा में पीड़ा से विह्वल शब्द सुनायी पड़ा। भीतर जाकर देखा तो साक्षात् गुरुदेव ही विकलता से करवटें बदल रहे हैं। शिवाजी ने हाथ जोड़कर उनकी वेदना का कारण पूछा।

समर्थ ने कहा —‘शिवा, भीषण उदर पीड़ा से विकल हूँ।’

‘महाराज ! इसकी दवा? ‘

‘शिवा ! इसकी कोई दवा नहीं, रोग असाध्य है। हाँ, एक ही दवा काम कर सकती है, पर जाने दो •••••••’।

‘नहीं, गुरुदेव ! निःसंकोच बतायें, शिवा गुरु को स्वस्थ किए बिना चैन नहीं ले सकता।’

‘सिंहिनी का दूध और वह भी ताजा निकाला हुआ, पर शिवा ! वह सर्वथा दुष्प्राप्य है ।’

पास में पड़ा गुरुदेव का तुम्बा उठाया और समर्थ को प्रणाम करके शिवाजी तत्काल सिंहिनी की खोज में निकल पड़े।

कुछ दूर जाने पर एक जगह दो सिंह शावक दीख पड़े। शिवाजी ने सोचा –निश्चय ही यहाँ इसकी माता आयेगी।संयोग से वह आ भी गयी। अपने बच्चों के पास अनजाने मनुष्य को देख वह शिवाजी पर टूट पड़ी और अपने जबड़े में उनकी गर्दन पकड़ ली।
शिवाजी कितने ही शूरवीर हों, पर यहाँ उन्हें सिंहिनी का दूध जो निकालना था। वे हाथ जोड़कर सिंहिनी से विनय करने लगे ——- ‘माँ ! मैं यहाँ तुम्हें मारने या तुम्हारे बच्चों को उठा ले जाने के लिए नहीं आया।गुरुदेव को स्वस्थ करने केलिए तुम्हारा दूध चाहिए, उसे निकाल लेने दो। गुरुदेव को दे आऊँ फिर भले ही तुम मुझे खा लेना। ‘शिवाजी ने ममता भरे हाथ से उसकी पीठ सहलायी।

मूक प्राणी भी ममता से प्राणी के अधीन हो जाते हैं। सिंहिनी का क्रोध शान्त हो गया। उसने शिवाजी का गला छोड़ा और बिल्ली की तरह उन्हें चाटने लगी।

मौका देख शिवाजी ने उसकी कोख में हाथ डाल दूध निचोड़ तुम्बा भर लिया और उसे नमस्कार कर बड़े आनंद के साथ वे निकल पड़े।

इधर सभी शिष्य भी गुरु से आ मिले। गुरु उन्हें साथ लेकर एक आश्चर्य दिखाने जंगल में बढ़े। शिवाजी बड़े आनंद से आगे बढ़ रहे थे कि समर्थ शिष्यों के सहित उनके पीछे पहुँच गये। उन्होंने आवाज लगायी।

शिवाजी ने पीछे मुड़कर देखा। पूछा —- ‘उदरशूल कैसा है? ‘

‘आखिर तुम सिंहिनी का दूध भी ले आये, धन्य हो शिवा ! तुम्हारे जैसा एकनिष्ठ शिष्य रहते गुरु को पीड़ा ही क्या रह सकती है।’ समर्थ ने सिर पर हाथ रखते हुए कहा।

आचार्य, डा.अजय दीक्षित

डा. अजय दीक्षित जी द्वारा लिखे सभी लेख आप नीचे TAG में Dr. Ajay Dixit पर क्लिक करके पढ़ सकते है।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े –  भारत के अदभुत मंदिर

सम्पूर्ण पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह

सम्बंधित लेख :- 

  • भगवान दत्तात्रेय और उनके 24 गुरु
  • कैसे हुआ बालि और सुग्रीव का जन्म तथा कैसे पड़ा ऋष्यमूक पर्वत का नाम
  • तुलसीदास जी कृत संकटमोचन हनुमानाष्टक (हिंदी अनुवाद सहित)
  • भगवान शिव ने ही दिया था विष्णु को सुदर्शन चक्र, जानिए पुराणों में वर्णित एक रोचक कथा
  • सर्वप्रथम हनुमान जी ने लिखी थी रामायण लेकिन फ़ेंक दी थी समुद्र में, जानिए क्यों?

Related posts:

विश्व महासागर दिवस का इतिहास, उद्देश्य और महत्व
National Doctors Day History In Hindi, How to Celebrate?, When and Where Doctors Day is Celebrated
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन के 15 प्रेरक प्रसंग
प्रेरक प्रसंग - बांस का पेड़
रानी कर्णावती की कहानी और इतिहास
अप्रैल फूल डे का इतिहास | April Fool Day History In Hindi
महात्मा गाँधी के जीवन से जुड़े 10 प्रेरक प्रसंग
प्रेरक प्रसंग - पिछले जन्म का कर्ज
मतीरे की राड़ - जब एक मतीरे (तरबूज) के लिए लड़ा गया खुनी युद्ध
पद्मिनी-गोरा-बादल | Padmini-Gora-Badal | Poem By Pandit Narendra Mishra

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Daily Horoscope

04/17/26

Pages

  • AdTest
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Guest Post & Sponsored Post
  • Privacy Policy
©2026 Ajab Gajab | Design: Newspaperly WordPress Theme