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सदियों पहले ही हनुमान चालीसा में दर्ज थी सूरज से धरती की दूरी

Posted on March 11, 2017June 8, 2021 by Pankaj Goyal

Earth Sun Distance In Hanuman Chalisa: सदियों से विभिन्न धार्मिक ग्रंथ विज्ञान को चुनौती देते आ रहे हैं। ग्रंथों में लिखे तथ्य आज भी लोगों को चौंका देते हैं। आज हम आपको हनुमान चालीसा में वर्णित एक ऐसा ही तथ्य के बारे में बताने जा रहे हैं, जो की धर्म ग्रंथों की महिमा के बारे में बताता है।

यह भी पढ़े – तुलसीदास जी कृत संकटमोचन हनुमानाष्टक (हिंदी अनुवाद सहित)

earth sun distance in hanuman chalisa, Hindi

17 वीं शताब्दी में वैज्ञानिक जियोवानी कैसिनी और जीन रिकर ने सूरज और धरती के बीच की दूरी का आंकलन किया था। जिसमें उन्होंने धरती और सूर्य की दूरी 149.6 मिलियन किलोमीटर यानी 14,96,00,000 किलोमीटर बताई थी। हनुमान चालीसा 16वीं शताब्दी में तुलसीदास द्वारा अवधी भाषा में लिखी गई थी। इन चालीस चौपाइयों में बजरंग बली का पूरा वर्णन है।

हनुमान चालीसा की 18 वीं चौपाई में धरती और सूरज की बीच की दूरी का वर्णन किया गया है। हनुमान चालीसा की 18वी चौपाई जुग सहस्र जोजन पर भानु । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।। हिन्दू वैदिक साहित्य के हिसाब से 1 जुग यानि 12000, सहस्र यानि 1000, 1 योजन यानि 8 मील। अगर गुणा किया जाए तो 1200*1000*8 = 96,000,000 मील, 1 मील = 1.6 कि.मी. 96,000,000*1.6 = 15,36,00,000 कि.मी. इस चौपाई का अर्थ है, 96,000,000 मील की दूरी पर सूरज को मीठा फल समझकर मारुती नंदन यानि हनुमानजी उसे निगल गए थे। इस चौपाई से मिली सूरज और धरती के बीच की दूरी काफी हद तक वैज्ञानिक आंकलन से मिलती है।

इससे यह बात तो साफ है कि धर्म ग्रंथों में सदियों पहले ही दुनिया की कई ख़ास बातों-रहस्यों का वर्णन कर दिया गया हैं।

यह भी पढ़े – श्री हनुमान चालीसा का भावार्थ

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