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शनिश्चरी अमावस्या के उपाय (राशि अनुसार)

Posted on June 22, 2017 by Pankaj Goyal

शनिश्चरी अमावस्या | Shanichari Amavasya | ज्योतिष उपाय | राशि अनुसार – शास्त्रों में शनिवार की अमावस्या का काफी अधिक महत्व बताया गया है। इसे शनिश्चरी अमावस्या (Shanichari Amavasya) भी कहते हैं। यहां जानिए महामंडलेश्वर परमहंस दाती जी महाराज द्वारा बताए गए राशि अनुसार उपाय जो शनिवार की अमावस्या पर किए जा सकते हैं।

यह भी पढ़े – मौनी अमावस्या को किए जाने वाले तांत्रिक उपाय

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मेष राशि
शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पहले उठें और स्नान के बाद सवा किलो बाजरा मिट्टी के बर्तन में भरकर उसके ऊपर सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। इसके बाद आसन पर बैठकर शनि मंत्र ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनेय नम: मंत्र की पांच माला जाप करें। जाप के बाद यह बाजरा 60 साल से ज्यादा उम्र के किसी वृद्घ व्यक्ति को दान में दें। उसके बाद श्रद्धानुसार गर्म कंबल गरीब व जरूरतमंद लोगों को बांटें।

वृष राशि
शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान के बाद सवा किलो अरहर (तुवर) की दाल मिट्टी के पात्र में भरकर उसके ऊपर सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। आसन पर बैठकर शनि मंत्र ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनेय नम: मंत्र की पांच माला जाप करें। इसके बाद यह दाल 9 साल की कम उम्र की कन्या को दान में दे दें। शनि अमावस्या पर बड़ (बरगद) या पीपल के नीचे सूर्योदय से पहले कड़वे तेल का दीपक जलाएं। जल में कच्चा दूध मिलाएं और वृक्षों को अर्पित करें। फिर वहां की मिट्टी से तिलक करें।

मिथुन राशि
शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पहले उठकर स्नान के बाद सवा किलो साबूत मूंग हरे कपड़े में बांधकर साफ बर्तन में रखकर घर के मंदिर में रखें। श्रद्घापूर्वक श्रीशनिदेव का ध्यान करते हुए पूजा करें। बर्तन के ऊपर सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। आसन पर बैठकर ऊँ नमो भगवते शनैश्चराय सूर्यपुत्राय नम:। मंत्र की 11 माला जाप करें। जाप के बाद यह साबूत मूंग 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले किन्नर को दक्षिणा सहित दान करें और चरण स्पर्श करें। शनि अमावस्या पर श्रद्घानुसार या वजन के बराबर बाजरा गौशाला में दान देने से कारोबार, परिवार और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का निवारण होता है।

कर्क राशि
शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पहले उठकर नहाने के बाद सवा किलो अखंडित चावल किसी मिट्टी के पात्र में भरकर सवा मीटर स्वच्छ सफेद कपड़े पर अपने पूजा स्थान में रखें। सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। श्रीशनिदेव का ध्यान करते हुए पूजन करें। आसन पर बैठकर शनि मंत्र ह्रीं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामात्र्ताण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्।। मंत्र की 5 माला जाप करें। जाप के बाद चावल वस्त्र सहित किसी कुष्ठ रोगी को दक्षिणा सहित दान करें और चरण स्पर्श करें। उसके बाद शनि अमावस्या पर ही गौशाला में देसी चने दान करना लाभकारी रहेगा।

सिंह राशि
शनि अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले उठें और नहाने के बाद सवा किलो गेहूं किसी मिट्टी के बर्तन में भरें, सवा मीटर स्वच्छ लाल कपड़े के ऊपर रखकर अपने पूजा घर में रखें। सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। श्रीशनिदेव का ध्यान करते हुए पूजन करें। आसन पर बैठकर इस मंत्र- सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय। मन्दचार: प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु मे शनि:।। की 5 माला जाप करें। जाप के बाद यह गेहूं वस्त्र सहित किसी कुष्ठ रोगी को दक्षिणा सहित दान करें और चरण स्पर्श करें। शनि अमावस्या पर ही गौशाला में सरसों की खली का दान दें।

कन्या राशि
शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पहले उठें और स्नान के बाद सवा किलो मशरुम मिट्टी के बर्तन में भरकर सवा मीटर स्वच्छ हरा कपड़े के ऊपर रखकर अपने पूजा घर में रखें। सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। श्रीशनिदेव का ध्यान करते हुए पंचोपचार पूजन करें। तत्पश्चात शुद्घ आसन पर बैठकर मंत्र ऊँ प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम:। की 7 माला जाप करें। जाप के बाद मशरुम, पात्र और वस्त्र किसी किन्नर को दक्षिणा सहित दान करें और चरण स्पर्श करें। शनि अमावस्या केला मीठी खील, गुड़ व देसी चने गरीब मजदूर लोगों को बांटे।

तुला राशि
शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पहले जागें और स्नान के बाद सवा किलो जौ किसी कांसे के बर्तन में भरकर सवा मीटर स्वच्छ सफेद कपड़े के ऊपर रखकर अपने पूजा स्थान में रखें। सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। श्रीशनिदेव का ध्यान करते हुए पंचोपचार पूजन करें। तत्पश्चात शुद्घ आसन पर बैठकर ऊँ शं शनैश्चराय नम:। मंत्र की 7 माला जाप करें। जाप के बाद यह जौ, पात्र और वस्त्र किसी विधवा स्त्री को दक्षिणा सहित दान करें और चरण स्पर्श करें। शनि अमावस्या पर ही श्रद्धानुसार या वजन के बराबर गेहूं मंदिर में दान दें।

वृश्चिक राशि
शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पहले उठें और स्नान के बाद सवा किलो साबूत मसूर किसी तांबे के पात्र में भरकर सवा मीटर स्वच्छ लाल कपड़े के ऊपर रखकर अपने पूजा स्थान में रखें। सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। श्रीशनिदेव का ध्यान करते हुए पूजन करें। आसन पर बैठकर मंत्र- ऊँ शं शनैश्चराय नम: ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया। कंटकी कलही चाथ तुरंगी महिषी अजा ऊँ शं शनैश्चराय नम:।। मंत्र की 5 माला जाप करें। जाप के बाद साबूत मसूर, पात्र और वस्त्र सहित किसी सफाई कर्मचारी को दक्षिणा सहित दान करें और चरण स्पर्श करें। शनि अमावस्या पर ही शाम को 5 से 6 बजे के बीच में सवा किलो त्रिचोली (गेहूं का आटा, चावल का आटा और शकर बूरा बराबर मात्रा में मिलाएं) चींटियों को डालें।

धनु राशि
शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पहले उठें और स्नान के बाद सवा 5 किलो चने की दाल सवा पांच मीटर स्वच्छ पीले कपड़े में बांधकर अपने पूजा स्थान में रखें। श्रीशनिदेव का ध्यान करते हुए पूजन करें। सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। आसन पर बैठकर इस ऊं शं वज्रदेहाय नम: मंत्र की 5 माला जाप करें। जाप के बाद यह चने की दाल किसी भी पिंगल खाने में श्रद्घानुसार दक्षिणा सहित दान दे दें। शनि अमावस्या पह ही श्रद्घानुसार या वजन के बराबर मक्का किसी मंदिर में दान करें।

मकर राशि
शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पहले उठकर स्नान के बाद सवा 5 किलो देसी चना सवा पांच मीटर स्वच्छ नीले कपड़े में बांधकर अपने पूजा स्थान में रखें। सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। श्रीशनिदेव का ध्यान करते हुए पूजन करें। आसन पर बैठकर इस मंत्र- ऊँ शं सर्वारिष्ट विनाशने। की 11 माला जाप करें। यह देसी चना और वस्त्र किसी ब्राह्मण को दक्षिणा सहित दान में दें। शनि अमावस्या पर ही गरीब जरूरतमंद लोगों के लिए भंडारे की व्यवस्था करें।

कुंभ राशि
शनि अमावस्या पर सूर्योदय से पहले उठें और स्नान सवा 5 किलो साबुत उड़द सवा पांच मीटर स्वच्छ काले कपड़े में बांधकर अपने पूजा स्थान में रखें। सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। श्रीशनिदेव का ध्यान करते हुए पूजन करें। आसन पर बैठकर इस शनि गायत्री मंत्र ऊँ भगभवाये विद्महे मृत्युरुपाय धीमही तन्नो शनि प्रचोदयात्॥ की 11 माला जाप करें। जाप के बाद यह साबुत उड़द वस्त्र सहित किसी गौशाला या मंदिर में दान में दें। शनि अमावस्या पर ही सात सूखे नारियल और 700 ग्राम बादाम श्रद्धानुसार किसी मंदिर में दान करें।

मीन राशि
शनि अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान आदि के बाद किसी लोहे के पात्र में सवा 8 किलो सरसों का तेल भरकर सवा मीटर स्वच्छ पीले कपड़े के ऊपर रखकर अपने पूजा स्थान में रखें। श्रीशनिदेव का ध्यान करते हुए पूजन करें। सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। आसन पर बैठकर इस मंत्र ऊं ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नम: की 5 माला जाप करें। जाप के बाद यह तेल किसी मंदिर में दक्षिणा सहित दान करें। उसके बाद शनि अमावस्या पर श्रद्घानुसार या वजन के बराबर साबूत हल्दी गरीबों में बांट दें।

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