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Good Qualities of Ravan : अहंकारी रावण में थी ये खूबियां, जो उसे बनाती है महान

Posted on June 18, 2015August 11, 2016 by Pankaj Goyal

Good Qualities of Ravan : हर प्राणी के भीतर कुछ बुराइयां होती है और कुछ अच्छाइयां।  रावण के साथ भी ऐसा ही था। रावण का सबसे बड़ा दुर्गुण उसका अहंकार था, जिसने उसका सर्वनाश करा दिया। लेकिन यह भी सत्य है की रावण में अनेकों खूबियां भी थी जो की उसे महान बनाती है।  महर्षि वाल्मीकि की रामायण में भी वर्णन आता है की जब हनुमान जी माँ सीता की खोज में लंका पहुंचे थे तो वो भी रावण की कई खूबियों से आकर्षित हुए थे। आज इस लेख में हम रावण की इन्ही गुणों के बारे में बताएँगे।

Good Qualities of Ravan in Hindi

1. रावण की मां का नाम कैकसी था और पिता ऋषि विशर्वा थे। कैकसी दैत्य कन्या थीं। रावण के भाई विभिषण, कुंभकर्ण और बहन सूर्पणखा के साथ ही देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव भी रावण के भाई हैं।

2. एक बार रावण ने अपनी शक्ति के मद में शिवजी के कैलाश पर्वत को ही उठा लिया था। उस समय भोलेनाथ ने मात्र अपने पैर के अंगूठे से ही कैलाश पर्वत का भार बढ़ा दिया और रावण उसे अधिक समय तक उठा नहीं सका। इस दौरान रावण का हाथ पर्वत के नीचे फंस गया। बहुत प्रयत्न के बाद भी रावण अपना हाथ वहां से नहीं निकाल सका। तब रावण ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए उसी समय शिव तांडव स्रोत रच दिया। शिवजी इस स्रोत से बहुत प्रसन्न हो गए।

3. रावण बहुत विद्वान, चारों वेदों का ज्ञाता और ज्योतिष विद्या में पारंगत था। उसके जैसी तीक्ष्ण बुद्धि वाला कोई भी प्राणी पृथ्वी पर नहीं हुआ। इंसान के मस्तिष्क में बुद्धि और ज्ञान का भंडार होता है, जिसके बल पर वह जो चाहे हासिल कर सकता है। रावण के तो दस सिर यानी दस मस्तिष्क थे। कहते हैं, रावण की विद्वता से प्रभावित होकर भगवान शंकर ने अपने घर की वास्तुशांति हेतु आचार्य पंडित के रूप में दशानन को निमंत्रण दिया था।

4. रावण भगवान शंकर का उपासक था। कुछ कथाओं के अनुसार- सेतु निर्माण के समय रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की गई, तो उसके पूजन के लिए किसी विद्वान की खोज शुरू हुई। उस वक्त सबसे योग्य विद्वान रावण ही था, इसलिए उससे शिवलिंग पूजन का आग्रह किया गया और शिवभक्त रावण ने शत्रुओं के आमंत्रण को स्वीकारा था।

5. रावण महातपस्वी था। अपने तप के बल पर ही उसने सभी देवों और ग्रहों को अपने पक्ष में कर लिया था। कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने रावण को अमरता और विद्वता का वरदान दिया था।

6. रावण को रसायन शास्त्र का ज्ञान था। उसे कई अचूक शक्तियां हासिल थीं, जिनके बल पर उसने अनेक चमत्कारिक कार्य सम्पन्न किए। अग्निबाण, ब्रह्मास्त्र आदि इनमें गिने जा सकते हैं।

7. वेदों की ऋचाओं पर अनुसंधान कर रावण ने विज्ञान के अनेक क्षेत्रों में उल्लेेखनीय सफलता हासिल की। वह आयुर्वेद की जानकारी भी रखता था। रावण एक महान कवि भी था। उसका यह कौशल शिव तांडव स्तोत्र में नजर आता है। यही नहीं, वह वीणा बजाने में भी सिद्धहस्त था। उसने एक वाद्य भी बनाया था, जिसे बेला कहा जाता था। इस यंत्र को वायलिन का ही मूल और प्रारम्भिक रूप मान सकते हैं। इस वाद्य को ‘रावण हत्था’ भी कहते हैं।

8. रावण जब किसी भी कार्य को हाथ में लेता, तो उसे पूरी निष्पक्षता और कर्तव्यभाव से पूर्ण करता। शिव के प्रति भक्ति की अनन्य लगनशीलता के कारण तांडव स्तोत्र की रचना की थी। इसी के बल पर रावण ने शिव को प्रसन्न कर वरदान पा लिया। अपनी सच्ची लगनशीलता के कारण दिव्य अस्त्र-शस्त्र, मंत्र-तंत्र की सिद्धियां प्राप्त कर रावण विश्वविख्यात बना।

9. रावण निर्भीक था। वह किसी भी व्यक्ति के सामने अपना पक्ष पूर्ण तर्क और दम-खम के साथ रखता था। युद्ध के मैदान में राम, लक्ष्मण, हनुमान जैसे योद्धाओं को सामने देख वह तनिक भी विचलित नहीं हुआ। स्वयं राम ने रावण की बुद्धि और बल की प्रशंसा की, इसलिए जब रावण मृत्यु-शैय्या पर था, तब राम ने लक्ष्मण को रावण से सीख लेने के लिए कहा।

10. रामायण में लिखा है हनुमानजी ने रावण के वैभव को देखते हुए कहा था कि…

अहो रूपमहो धैर्यमहोत्सवमहो द्युति:।
अहो राक्षसराजस्य सर्वलक्षणयुक्तता।।

इस श्लोक का अर्थ यह है कि रावण रूप-रंग, सौंदर्य, धैर्य, कांति तथा सर्वलक्षणों से युक्त है। यदि रावण में अधर्म अधिक बलवान न होता तो यह देवलोक का भी स्वामी बन सकता था।

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