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शिव चतुर्दशी व्रत कथा, व्रत विधि | Shiv Chaturdashi Vrat Katha Vrat Vidhi

Posted on November 16, 2017 by Pankaj Goyal

Shiv Chaturdashi Vrat Katha Vrat Vidhi in Hindi | भविष्यपुराण के अनुसार प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भगवान शिव को समर्पित है। इसलिए इसे शिव चतृर्दशी कहते हैं। इस दिन पुरे विधि विधान से भगवान शिव का पूजन और व्रत किया जाता हैं। इस व्रत को करने से व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि के बंधन से मुक्त हो जाता है।

Shiv Chaturdashi Vrat Katha Hindi

शिव चतुर्दशी व्रत विधि | Shiv Chaturdashi Vrat Vidhi
शिव चतुर्दशी व्रत में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी और शिवगणों की पूजा की जाती है। पूजा के प्रारम्भ में भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। इस अभिषेक में जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, शक्कर या चीनी,गंगाजल तथा गन्ने के रसे आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक कराने के बाद बेलपत्र, समीपत्र, कुशा तथा दूब आदि से शिवजी को प्रसन्न करते हैं। अंत में भांग, धतूरा तथा श्रीफल भोलेनाथ को भोग के रुप में चढा़या जाता है। शिव चतुर्दशी के दिन पूरा दिन निराहार रहकर इनके व्रत का पालन करना चाहिए।

चतुर्दशी के दिन रात्रि के समय शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए। शिवजी के कुछ विशेष मंत्र निम्न हैं:
“ऊँ नम: शिवाय” व ” शिवाय नम:”

रात को सोते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए:

शंकराय नमसेतुभ्यं नमस्ते करवीरक।
त्र्यम्बकाय नमस्तुभ्यं महेश्र्वरमत: परम्।।
नमस्तेअस्तु महादेवस्थाणवे च ततछ परमू।
नमः पशुपते नाथ नमस्ते शम्भवे नमः।।
नमस्ते परमानन्द नणः सोमार्धधारिणे।
नमो भीमाय चोग्राय त्वामहं शरणं गतः।।

मान्यता है कि शिव मंत्रों का जाप शिवालय यानि शिव मंदिर या घर के पूर्व भाग में बैठकर करने से अधिक फल प्राप्त होता है। चतुर्दशी के उपरांत ब्राह्मणों को भोजन कराके स्वयं भोजन करना चाहिए।

शिव चतुर्दशी व्रत का फल | Importance Of Shiv Chaturdashi Vrat
शिव चतुर्दशी का व्रत जो भी व्यक्ति पूरे श्रद्धाभाव से करता है उसके माता- पिता के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा उसके स्वयं के सारे कष्ट दूर हो जाते है तथा वह जीवन के सम्पूर्ण सुखों का भोग करता है। इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य, संतान एवं विद्या आदि प्राप्त कर अंत में शिवलोक जाता है।

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