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Bach Baras Story in Hindi

बछ बारस की कहानी, पूजा विधि और उद्यापन विधि

Posted on August 25, 2019August 8, 2020 by Pankaj Goyal

Bach Baras Story in Hindi, Bach Baras Puja Vidhi, Bach Baras Vrat Katha – बछ बारस का त्यौहार जन्माष्टमी के चार दिन बाद भाद्रपद (भादों) द्वादशी को मनाया जाता हैं। बछ बारस के दिन विवाहित महिलाये पुत्र प्राप्ति और मंगल कामना के लिए व्रत करती है। इस दिन व्रत रखने वाले स्त्री को गाय के बछड़े की पूजा करनी चाहिए। अगर किसी के यहाँ गाय का बछड़ा ना हो तो किसी दूसरे की गाय के बछड़े की पूजा की जाती हैं। किसी भी सूरत में गाय का बछड़ा ना मिले तो बछबारस की पूजा के लिए मिट्टी का गाय का बछड़ा बनाकर भी पूजा की जाती हैं।  2019 में बछ बारस का पर्व 27 अगस्त 2019 मंगलवार को आ रहा है।

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Bach Baras Story in Hindi

बछ बारस की कहानी | Bach Baras Story in Hindi

बहुत समय पहले की बात है एक गाँव में एक साहूकार अपने सात बेटो और पोतो के साथ रहता था। उस साहूकार ने गाँव में एक तालाब बनवाया था लेकिन बारह सालो तक वो तालाब नही भरा था। तालाब नही भरने का कारण पूछने के लिए उसने पंडितो को बुलाया। पंडितो ने कहा कि इसमें पानी तभी भरेगा जब तुम या तो अपने बड़े बेटे या अपने बड़े पोते की बलि दोगे। तब साहूकार ने अपने बड़ी बहु को तो पीहर भेज दिया और पीछे से अपने बड़े पोते की बलि दे दी। इतने में गरजते बरसते बादल आये और तालाब पूरा भर गया।

इसके बाद बछबारस आयी और सभी ने कहा की “अपना तालाब पूरा भर गया है इसकी पूजा करने चलो”। साहूकार अपने परिवार के साथ तालाब की पूजा करने गया। वह दासी से बोल गया था की गेहुला को पका लेना। गेहुला से तात्पर्य गेहू के धान से है। दासी समझ नही पाई। दरअसल गेहुला गाय के बछड़े का नाम था। उसने गेहुला को ही पका लिया। बड़े बेटे की पत्नी भी पीहर से तालाब पूजने आ गयी थी। तालाब पूजने के बाद वह अपने बच्चो से प्यार करने लगी तभी उसने बड़े बेटे के बारे में पुछा।

तभी तालाब में से मिटटी में लिपटा हुआ उसका बड़ा बेटा निकला और बोला की माँ मुझे भी तो प्यार करो। तब सास बहु एक दुसरे को देखने लगी | सास ने बहु को बलि देने वाली सारी बात बता दी। फिर सास ने कहा की बछबारस माता ने हमारी लाज रख ली और हमारा बच्चा वापस दे दिया। तालाब की पूजा करने के बाद जब वह वापस घर लौटे तो उन्होंने देखा बछड़ा नही था। साहूकार ने दासी से पूछा की बछड़ा कहा है तो दासी ने कहा कि “आपने ही तो उसे पकाने को कहा था”।

साहूकार ने कहा की “एक पाप तो अभी उतरा ही है तुमने दूसरा पाप कर दिया “।साहूकार ने पका हुआ बछड़ा मिटटी में दबा दिया। शाम को गाय वापस लौटी तो वह अपने बछड़े को ढूंढने लगी और फिर मिटटी खोदने लगी। तभी मिटटी में से बछड़ा निकल गया। साहूकार को पता चला तो वह भी बछड़े को देखने गया। उसने देखा कि बछडा गाय का दूध पीने में व्यस्त था। तब साहूकार ने पुरे गाँव में यह बात फैलाई कि हर बेटे की माँ को बछबारस का व्रत करना चाहिए। हे बछबारस माता ! जैसा साहूकार की बहु को दिया वैसा हमे भी देना। कहानी कहते सुनते ही सभी की मनोकामना पूर्ण करना।

बछ बारस की पूजा विधि | Bachh Baras Pooja Vidhi

सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर शुद्ध कपड़े पहने और पूजा की सामग्री तैयार करे। दूध देने वाली गाय और उसके बछड़े को साफ पानी से नहलाकर शुद्ध कर उन्हे नए वस्त्र ओढ़ाएँ, फूल माला पहनाएँ, उनके सींगों को सजाएँ और उन्हें तिलक करें। गाय के रोली का टीका लगाकर चावल के स्थान पर बाजरा लगाये।

गाय और बछड़े को भीगे हुए अंकुरित चने, मूंग, मोठ, बाजरे, मटर; चने के बिरवे, जौ की रोटी आदि खिलाएँ। गौ माता के पैरों की धूल से खुद के तिलक लगाएँ। कुए की पूजा करें।

कुए के प्रतिक के तौर पर घरों के बाहर गोबर से घेरा (पाळ) बनाकर उसमे पानी भर कर पूजन किया जाता है। यदि गोबर ना मिल पाए तो एक पाटे पर मिटटी से बछबारस बनाते है और उसके बीच में एक गोल मिटटी की बावडी बनाते है। फिर उसको थोडा दूध, दही, पानी से भर देते है | फिर सब चीजे चढाकर पूजा करते है। इसके बाद रोली, दक्षिणा चढाते है।

पूजन के समय बच्चे भी मां का पल्लू थामकर पूजन थाल/पाळ से लड्डू उठाकर और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस प्रकार गाय और बछड़े की पूजा करने के बाद महिलायें अपने पुत्र के तिलक लगाकर उसे लड्डू खिलाने के बाद नारियल देकर उसकी लंबी उम्र और सकुशलता की कामना करते हुए आशीर्वाद देती हैं।

यदि आपके घर में खुद की गाय नहीं हो तो दूसरे के यहाँ भी गाय बछड़े की पूजा की जा सकती है। ये भी संभव नहीं हो तो गीली मिट्टी से या आटे से गाय और बछड़े की आकृति बना कर उनकी पूजा कर सकते है। कुछ लोग सुबह आटे से गाय और बछड़े की आकृति बनाकर पूजा करते है। Bachh Baras बछबारस के चित्र की पूजा भी की जा सकती है | शाम को गाय चारा खाकर वापस आती है तब उसका पूजन धुप, दीप, चन्दन, नैवेद्य आदि से करते है।

इसके बाद बछ बारस की कहानी सुने। हाथ में मोठ और बाजरे के दाने को लेकर बछ बारस की कहानी व प्रचलित लोककथा सुनते है। बड़े बुजुर्ग के पाँव छूकर उनसे आशीर्वाद लें। अपनी श्रद्धा और रिवाज के अनुसार व्रत या उपवास रखें। मोठ या बाजरा दान करें। सासुजी को बयाना (कलपना) देकर आशीर्वाद लें। बायने के लिए एक कटोरी में भीगा हुआ चना, मोठ ,बाजरा और रुपया रखे।

बछ बारस के व्रत का उद्यापन | Bach Baras Vrat Udyapan Vidhi

जिस साल लड़का हो या जिस साल लडके की शादी हो उस साल बछबारस का उद्यापन किया जाता है। सारी पूजा हर वर्ष की तरह करे। सिर्फ थाली में सवा सेर भीगे मोठ बाजरा की तरह कुद्दी करे। दो दो मुट्ठी मोई का (बाजरे की आटे में घी ,चीनी मिलाकर पानी में गूँथ ले ) और दो दो टुकड़े खीरे के तेरह कुडी पर रखे। इसके उपर एक तीयल (दो साडीया और ब्लाउज पीस ) और रुपया रखकर हाथ फेरकर सास को छुकर दे। इस तरह Bach Baras बछबारस का उद्यापन पूरा होता है।

बछ बारस पर ध्यान रखें ये बातें – इस दिन गाय का दूध और दूध से बने पदार्थ जैसे दही , मक्खन , घी आदि का उपयोग नहीं किया जाता। इसके अलावा गेहूँ और चावल तथा इनसे बने सामान नहीं खाये जाते । भोजन में चाकू से कटी हुई किसी भी चीज का सेवन नहीं करते है। इस दिन अंकुरित अनाज जैसे चना , मोठ , मूंग , मटर आदि का उपयोग किया जाता है। भोजन में बेसन से बने आहार जैसे कढ़ी , पकोड़ी , भजिये आदि तथा मक्के , बाजरे ,ज्वार आदि की रोटी तथा बेसन से बनी मिठाई का उपयोग किया जाता है।

कुछ अन्य व्रत कथाएं

  • षटतिला एकादशी व्रत कथा, व्रत विधि, महत्व
  • पिठोरी अमावस्या (पोलाला अमावस्या) व्रत कथा, व्रत विधि
  • उपांग ललिता पंचमी व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व

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