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जानिये भारत में स्तिथ यमराज (धर्मराज) के चार प्राचीन मंदिरों के बारे में (Famous Yamraj (Dharmraj) Temples of India)

Posted on October 21, 2014March 4, 2016 by Pankaj Goyal

Famous Yamraj (Dharmraj) Temples History in Hindi : यदि आप इंटरनेट पर यमराज (धर्मराज) को समर्पित मंदिरों के बारे में सर्च करेंगे तो आप पाएंगे की अधिकतर साइटों पर हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नामक स्थान पर स्तिथ मंदिर को यमराज (धर्मराज) का इकलौता मंदिर बताया गया है पर वास्तव में ऐसा नहीं है आज हम आपको यहाँ यमराज (धर्मराज) को समर्पित चार प्राचीन मंदिरों के बारे में बातएंगे। पर पहले यहाँ यह जान लेना आवश्यक है की धर्मराज भी यमराज का ही एक नाम है। यमराज का नाम धर्मराज इसलिए पड़ा क्योंकि धर्मानुसार उन्हें जीवों को सजा देने का कार्य प्राप्त हुआ था।

यमराज (धर्मराज) मंदिर – भरमौर – हिमाचल  (Yamraj temple Chamba Himachal) :-

yamraj temple chamba himachal  History

यम देवता को समर्पित यह मंदिर हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नामक स्थान पर स्तिथ है।  यह जगह दिल्ली से करीब 500 किलोमीटर दूर स्तिथ है। यह मंदिर देखने में एक घर की तरह दिखाई देता है।  इस मंदिर में एक खाली कक्ष भी है जिसे चित्रगुप्त का कक्ष कहा जाता है। चित्रगुप्त यमराज के सचिव हैं जो जीवात्मा के कर्मो का लेखा-जोखा रखते हैं।

yamraj temple chamba himachal Story

इस मंदिर से जुडी मान्यता है कि जब किसी प्राणी की मृत्यु होती है तब यमराज के दूत उस व्यक्ति की आत्मा को पकड़कर सबसे पहले इस मंदिर में चित्रगुप्त के सामने प्रस्तुत करते हैं। चित्रगुप्त जीवात्मा को उनके कर्मो का पूरा ब्योरा देते हैं। इसके बाद चित्रगुप्त के सामने के कक्ष में आत्मा को ले जाया जाता है। इस कमरे को यमराज की कचहरी कहा जाता है।

yamraj temple chamba himachal Kahani

यहां पर यमराज कर्मों के अनुसार आत्मा को अपना फैसला सुनाते हैं। यह भी मान्यता है इस मंदिर में चार अदृश्य द्वार हैं जो स्वर्ण, रजत, तांबा और लोहे के बने हैं। यमराज का फैसला आने के बाद यमदूत आत्मा को कर्मों के अनुसार इन्हीं द्वारों से स्वर्ग या नर्क में ले जाते हैं। गरूड़ पुराण में भी यमराज के दरबार में चार दिशाओं में चार द्वार का उल्लेख किया गया है।

श्री यमुना जी धर्मराज (यमराज) बहन-भाई मंदिर – विश्राम घाट – मथुरा :- (Yamuna Dharamraj temple Mathura)

Yamuna Dharamraj temple Mathura History in Hindi

यमुना जी और धर्मराज को समर्पित यह मंदिर मथुरा में यमुना जी के विश्राम घाट पर स्तिथ है। इस मंदिर को बहन-भाई के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि यमुना और यमराज भगवान सूर्य के पुत्री और पुत्र थे।इस मंदिर में यमुना और धर्मराज जी की मूर्तियां एक साथ लगी हुई है। ऐसी पौराणिक मान्यता है की जो भी भाई, भैया दूज (भाई दूज ) के दिन यमुना में स्नान करके  इस मंदिर में दर्शन करता उसे यमलोक जाने से मुक्ति मिल जाती है।  इसकी पुराणो में एक कथा भी है जो की बहने भैया दूज (यम द्वितीया) के दिन सुनती है।

Yamuna Dharamraj temple Mathura story in Hindi

यम द्वितीया (भाई दूज) की कहानी  (Yama dwitiya, bhai duaj, story)

सूर्य भगवान की स्त्री का नाम संज्ञा देवी था। इनकी दो संतानें, पुत्र यमराज तथा कन्या यमुना थी। संज्ञा देवी पति सूर्य की उद्दीप्त किरणों को न सह सकने के कारण उत्तरी ध्रुव प्रदेश में छाया बन कर रहने लगीं। उसी छाया से ताप्ती नदी तथा शनीचर का जन्म हुआ। इधर छाया का यम तथा यमुना से विमाता सा व्यवहार होने लगा। इससे खिन्न होकर यम ने अपनी एक नई नगरी यमपुरी बसाई, यमपुरी में पापियों को दण्ड देने का कार्य सम्पादित करते भाई को देखकर यमुनाजी गो लोक चली आईं जो कि कृष्णावतार के समय भी थी।

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यमुना अपने भाई यमराज से बडा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि वह उसके घर आकर भोजन करें। लेकिन यमराज अपने काम में व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात को टाल जाते थ। बहुत समय व्यतीत हो जाने पर एक दिन सहसा यम को अपनी बहन की याद आई। उन्होंने दूतों को भेजकर यमुना की खोज करवाई, मगर वह मिल न सकीं। फिर यमराज स्वयं ही गोलोक गए जहाँ विश्राम घाट पर यमुनाजी से भेंट हुई। भाई को देखते ही यमुनाजी ने हर्ष विभोर होकर उनका स्वागत सत्कार किया तथा उन्हें भोजन करवाया। इससे प्रसन्न हो यम ने वर माँगने को कहा –
यमुना ने कहा – हे भइया मैं आपसे यह वरदान माँगना चाहती हूँ कि मेरे जल में स्नान करने वाले नर-नारी यमपुरी न जाएँ।

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प्रश्न बड़ा कठिन था, यम के ऐसा वर देने से यमपुरी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाता। भाई को असमंजस में देख कर यमुना बोलीं – आप चिंता न करें मुझे यह वरदान दें कि जो लोग आज के दिन बहन के यहाँ भोजन करके, इस मथुरा नगरी स्थित विश्राम घाट पर स्नान करें वे तुम्हारे लोक को न जाएँ। इसे यमराज ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने बहन यमुनाजी को आश्वासन दिया – ‘इस तिथि को जो सज्जन अपनी बहन के घर भोजन नहीं करेंगे उन्हें मैं बाँधकर यमपुरी ले जाऊँगा और तुम्हारे जल में स्नान करने वालों को स्वर्ग होगा।’ तभी से यह त्यौहार मनाया जाता है।   (यदि आप और पौराणिक कहानियाँ पढ़ना चाहे तो यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह )

धर्मराज मंदिर – लक्ष्मण झूला – ऋषिकेश (Dharamraj temple, Rishikesh) :-

dharamraj temple rishikesh

यमराज (धर्मराज) को समर्पित यह प्राचीन मंदिर ऋषिकेश में स्तिथ है।

dharamraj temple rishikesh History

dharamraj temple rishikesh

श्री ऐमा धर्मराज टेम्पल (Sri Ema Dharmaraja temple) :-

Sri Ema Dharmaraja temple

यह मंदिर तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्तिथ है। यह मंदिर 1000 से 2000 साल पुराना बताया जाता है।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े –   भारत के अदभुत मंदिर
पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह
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Tag – Hindi, News, Story, Kahani, About, Temple, Yamraj, Dharmraj, Bhai-Behan Temple, Himachal Pradesh, Mathura, Pauranik katha, Mythological Story,

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