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चाणक्य नीति – जहां होती हैं ये तीन बातें, वहाँ हमेशा रहती है महालक्ष्मी की कृपा

Posted on May 12, 2016 by Pankaj Goyal

हमेशा से ही धन सभी की अनिवार्य आवश्यकता रहा है। मात्र धन से ही सभी सुविधाएं जुटाई जा सकती हैं। धन अभाव में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ लोग काफी मेहनत करते हैं लेकिन फिर भी वे धन की कमी से त्रस्त रहते हैं। इस संबंध आचार्य चाणक्य ने तीन मुख्य बातें बताई हैं।

Chanakya Neeti For Money

चाणक्य कहते हैं-
मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्यं यत्र सुसन्चितम्।
दाम्पत्ये कलहो नास्ति तत्र श्री: स्वयमागता।।

अर्थात : जिस देश या स्थान पर मूर्खों की पूजा नहीं होती, जहां हमेशा पर्याप्त मात्रा अन्न का भंडार रहता है, जिस घर में पति और पत्नी में झगड़े नहीं होते हैं वहां महालक्ष्मी सदैव निवास करती हैं।

आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस घर में मूर्खों की अपेक्षा बुद्धिमान लोगों को उचित मान-सम्मान दिया जाता है, स्वागत किया जाता है वहां महालक्ष्मी सदैव निवास करती हैं। इसके अतिरिक्त जिन घरों अन्न के पर्याप्त भंडार रहते हैं, जिस घर से कोई भूखा या खाली हाथ नहीं जाता है, जहां सभी अतिथियों अच्छे से आदर सत्कार किया जाता है, जहां सात्विक भोजन किया जाता है वहां धन की देवी महालक्ष्मी स्वयं विराजमान होती है। जिस घर में पति और पत्नी सदैव प्रेम से रहते हैं, जहां लड़ाई-झगड़ा नहीं होता है वहां से महालक्ष्मी कभी नहीं जाती हैं। जिन लोगों के साथ ये तीन बातें रहती हैं उन पर महालक्ष्मी सदैव कृपा बनाए रखती हैं।

कौन थे आचार्य चाणक्य

भारत के इतिहास में आचार्य चाणक्य का महत्वपूर्ण स्थान है। एक समय जब भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और विदेशी शासक सिकंदर भारत पर आक्रमण करने के लिए भारतीय सीमा तक आ पहुंचा था, तब चाणक्य ने अपनी नीतियों से भारत की रक्षा की थी। चाणक्य ने अपने प्रयासों और अपनी नीतियों के बल पर एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को भारत का सम्राट बनाया जो आगे चलकर चंद्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुए और अखंड भारत का निर्माण किया।

चाणक्य के काल में पाटलीपुत्र (वर्तमान में पटना) बहुत शक्तिशाली राज्य मगध की राजधानी था। उस समय नंदवंश का साम्राज्य था और राजा था धनानंद। कुछ लोग इस राजा का नाम महानंद भी बताते हैं। एक बार महानंद ने भरी सभा में चाणक्य का अपमान किया था और इसी अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए आचार्य ने चंद्रगुप्त को युद्धकला में पारंपत किया। चंद्रगुप्त की मदद से चाणक्य ने मगध पर आक्रमण किया और महानंद को पराजित किया।

आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। जो भी व्यक्ति नीतियों का पालन करता है, उसे जीवन में सभी सुख-सुविधाएं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

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