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विचित्र परंपरा: यहाँ जुड़वाँ बच्चों की मौत के बाद भी होती है उनकी परवरिश

Posted on September 4, 2015July 20, 2016 by Pankaj Goyal

Strange Tradition of Africans : पश्चिम अफ्रीकी देश बेनिन में फॉन जनजाति में जुड़वां बच्चों की मौत से जुड़ी एक विचित्र परंपरा प्रचलित है। आदिवासी समाज में जुड़वां बच्चे यदि जन्म के बाद जिंदा न रहें तो लकड़ी का पुतला बनाकर उनकी परवरिश की जाती है। यह परवरिश जुड़वां बच्चों की मौत होने पर इनके स्थान पर गुड्डे-गुड़ियां (डॉल्स) बना की जाती। यह परंपरा सिर्फ जुड़वां बच्चों के मरने पर ही निभाई जाती है।

Strange Tradition of Africans in Hindi

फॉन जनजाति के लोग अपने जिंदा रहने तक इन डॉल्स का पालन-पोषण जिंदा बच्चों की तरह ही करते हैं। डॉल्स को नहलाना, खाना खिलाना, कपड़े पहनाना और बिस्तर में सुलाना इनके लिए रोज का काम होता है। ये डॉल्स को हर रोज स्कूल भी पढ़ने के लिए भेजते हैं।

Vichitr Parmpara

फ्रेंच फोटोग्राफर एरिक लैफार्ग ने फॉन जनजाति के जीवन और उनकी परंपराओं पर आधारित एक डॉक्युमेंट्री फिल्म तैयार की है। एरिक ने बताया है कि जनजाति की मान्यता है कि यदि ऐसा न किया जाए तो उनकी आत्मा भटकती रहती है और परिवार वालों को तकलीफ देती हैं।

Amazing Tradition

यदि उनके पुतले बनाकर बच्चों की तरह देखरेख की जाए तो वे परिवार में सुख-समृद्धि लेकर आते हैं। ये लोग वूदू धर्म को मानते हैं। गुड्‌डे-गुड़ियों के रूप में बनवाए गए इन बच्चों को मां अपने सीने से ठीक उसी तरह चिपकाकर रखती है, जैसे जिंदा बच्चे को गोद में रखती है। उसे रोज नहलाया जाता है, खाना खिलाने की रस्म अदा की जाती है। रात होने पर उनके लिए खास तौर पर बनाए गए बिस्तर पर उन्हें थपकी देकर सुलाया जाता है। यहां तक कि उन्हें स्कूल में पढ़ने भी भेजा जाता है।

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फोन जनजाति के लोग हर दिन डॉल्स को झूला झुलाते हैं, खाना खिलाते हैं और साफ- सुथरा करते हैं। डॉल्स को हर दिन बिस्तर पर लिटाया जाता है। इस सबके पीछे यही कोशिश होती है कि मृत बच्चों की आत्माएं नाराज न हो जाएं। अगर ये नाराज हुए तो परिवार को श्राप दे देंगे।

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पैरेंट्स यदि कहीं लंबी यात्रा पर जा रहे हैं और इन पुतलों की देखरेख संभव ना हो तो वे इन्हें गांव में खासतौर पर बनाए गए झूलाघर में छोड़कर जाते हैं। इस झूलाघर में गांव के किसी बुजुर्ग को केयरटेकर के रूप में नियुक्त किया जाता है, जो इन पुतलों का मां-बाप की तरह ही ख्याल रखता है। पैरेंट्स यात्रा से वापस आकर इन बच्चों को घर ले जाते हैं।

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बेनिन के आदिवासी वूदू धर्म को मानते हैं। यहां जुड़वां बच्चों की संख्या अधिक होती है। हर 20 में से एक बच्चा जुड़वा पैदा होता है। जुड़वां बच्चों का पालन पोषण भी काफी कठिन होता है। अक्सर इनकी मौत हो जाती है। इसके बाद फॉन ट्राइब्स के लोग अपनी परंपरा के अनुसार बच्चों के डॉल्स बनाकर इनका पालन-पोषण करते हैं।

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