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स्कंदपुराण (Skanda Puran): हर मनुष्य में जरूर होनी चाहिए ये 8 बातें

Posted on November 24, 2015January 26, 2018 by Pankaj Goyal

Skanda Puran Shiksha : स्कंदपुराण हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पुराण में धर्म-अधर्म की सभी बातों के बारे में ज्ञान दिया गया है। जिन्हें समझकर मनुष्य जीवन में सफलता पा सकता है। पुराण में 8 ऐसी बातें बताई गई हैं, जो हर मनुष्य में होना चाहिए। जिस मनुष्य के अंदर ये 8 बातें होती हैं, वह जीवन में हर सुख और उन्नति पाता है।

Skanda Puran Shiksha
श्लोक-

सत्यं क्षमार्जवं ध्यानमानृशंस्यमहिंसनम्।
दमः प्रसादो माधुर्यं मृदुतेति यमा दश।।

अर्थ-
सत्य, क्षमा, सरलता, ध्यान, क्रूरता का अभाव, हिंसा का त्याग, मन और इन्द्रियों पर संयम, हमेशा प्रसन्न रहना, मधुर व्यवहार करना और सबके लिए अच्छा भाव रखना- ये 8 बातें हर किसी के लिए अनिर्वाय कही गई हैं।

हमेशा सच बोलना
हमेशा सच बोलना मनुष्य के लिए सबसे जरूरी माना गया है। जीवन में सफलता पाने के लिए सत्य का गुण होना बहुत जरूरी है। जो मनुष्य हमेशा सच बोलता है और सच का साथ देता है, उस पर भगवान हमेशा प्रसन्न रहते हैं और उसकी हर इच्छा पूरी होती है।

माफ करने की भावना
लोगों के मन में क्षमा यानी माफ करने की भावना होनी चाहिए। जो व्यक्ति दूसरों की बातों को मन से लगा कर बैठ जाता है और उन्हें माफ नहीं करता, ऐसे स्वभाव वाले मनुष्य को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वो हमेशा बदले की भावना में जीता है और बदला पूरा ना होने पर डिप्रेशन में चला जाता है। इसलिए, हमेशा मन में दूसरों को माफ करके आगे बढ़ने की भावना होनी चाहिए।

छल-कपट से दूर रहना
शास्त्रों में छल-कपट की भावना को सबसे बुरा कहा गया है। जिस व्यक्ति के मन में दूसरों के लिए छल-कपट की भावना रहती है, वह दुष्ट स्वभाव का होता है। ऐसा मनुष्य किसी का भी बुरा करने से पहले कुछ नहीं सोचता और दूसरों को दुख देना वाला होता है। ऐसी भावनाओं को कभी मन में नहीं आने देना चाहिए।

ध्यान या देव भक्ति
मनुष्य के लिए भगवान की पूजा-अर्चना करना, रोज उनका ध्यान करना बहुत जरूरी होता है। जो मनुष्य देव पूजा और भक्ति नहीं करता, वह नास्तिक स्वभाव का होता है। ऐसे मनुष्य पाप और पुण्य में कोई फर्क नहीं जानते और अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकता है। इसलिए, हर किसी को रोज अपना थोड़ा समय देव भक्ति और पूजा में देना चाहिए।

न हो दुष्ट और हिंसक
पाचवीं और छठी बात है क्रूरता का अभाव और हिंसा का त्याग। जो दूसरों को दुख पहुंचाता है और उनके साथ हिंसा करता है, वह हिंसक प्रवृत्ति का होता है। ऐसा इंसान किसी के भी साथ बुरा व्यवहार करने से कतराता नहीं है। हिंसक प्रवृत्ति के लोग दूसरों का ही नहीं बल्कि खुद का भी नुकसान करते हैं। इसलिए, हर मनुष्य को अहिंसा का पालन करना चाहिए।

मन को वश में रखना
जिस मनुष्य का मन वश में नहीं रहता, वह अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए कुछ भी कर सकता है। ऐसा मनुष्य किसी के भी साथ बुरा व्यवहार या हिंसा कर सकता है। कई बार उसकी इच्छाएं उसे अपराधी तक बना देती हैं। इसलिए, हमें अपने मन को हमेशा वश में रखना चाहिए। कभी भी अपनी इच्छाओं का खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

हमेशा खुश रहना
कहा जाता है कि जो मन से स्वस्थ रहता है, वह शरीर से भी स्वस्थ ही रहता है। जो हमेशा हसंने-मुस्कुराने वाला होता है, वह अपनी सारी परेशानियों का सामना बहुत ही आसानी से कर लेता है। हर व्यक्ति को हर परिस्थिति में खुश रहना चाहिए और नकारात्मक भावों को खुद से दूर ही रखना चाहिए।

सबसे साथ अच्छा और समान व्यवहार करना
नौवीं और दसवी बात है दूसरों के साथ अच्छा और सभी के साथ समान व्यवहार करना। कई लोगों के मन में असमानता का भाव होता है। वे अमीर-गरीब, छोटे-बड़े में भेद करते हैं और उनके साथ व्यवहार भी उसी तरह करते हैं। इस बात को शास्त्रों में बिल्कुल गलत बताया गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार जो मनुष्य दूसरों में भेद-भाव नहीं करता और सबके साथ समान व्यवहार करता है, वह जीवन में बहुत उन्नति करता है। ऐसे मनुष्य की सारी इच्छाएं पूरी होती है और सभी के लिए सम्मान का पात्र होता है।

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