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आइये चलें वैदिक संस्कृति की ओर | वेद की 7 आज्ञा

Posted on May 13, 2017April 5, 2021 by Pankaj Goyal

Vedon ki Aur Loto
Vedon ki Aur Loto

Vedon ki Aur Loto | वेद की आज्ञा – यदि जीवन में सुखी होना चाहते हो, शान्ति प्राप्त करना चाहते हो, तो केवल एक काम करो, वेद की आज्ञा मान लो और कुछ अलग नहीं करना पडेगा, केवल वेद के अनुसार अपना जीवन ढाल लो, निश्चित मानो सुखी और सम्पन्न हो जाओगे । जानिए वेद की आज्ञाओं के उलंघन का कितना भयंकर परिणाम हो सकता है ? भारत की दुर्गति के पीछे वेद की आज्ञाओं का उल्लंघन ही था ।

पहली आज्ञा =============== “अक्षैर्मा दिव्य:” (ऋ 10/34/13 जुआं मत खेलो । इस आज्ञा का उलंघन हुआ। इस आज्ञा का उलंघन धर्मराज कहे जाने वाले युधिष्टर ने किया। परिणाम : एक स्त्री का भरी सभा में अपमान। महाभारत जैसा भयंकर युद्ध जिसमें लाखों, करोड़ों योद्धा और हज़ारों विद्वान मारे गए। आर्यवर्त पतन की ओर अग्रसर हुआ। इसलिए कभी भी जुआ नहीं खेलना चाहिए।

दूसरी आज्ञा ============= “मा नो निद्रा ईशत मोत जल्पिः” (ऋ 8/48/14) अर्थात् “आलस्य, प्रमाद और बकवास हम पर शासन न करें ।” लेकिन इस आज्ञा का भी उलंघन हुआ । महाभारत के कुछ समय बाद भारत के राजा आलस्य प्रमाद में डूब गये । परिणाम : विदेशियों के आक्रमण ।धर्म के नाम पर अंधविश्वास का पाखण्ङ फैल जाना।

तीसरी आज्ञा ============= ” सं गच्छध्वं सं वदध्वम” (ऋ 10/191/2) अर्थात् “मिलकर चलो और मिलकर बोलो ।” वेद की इस आज्ञा का भी उलंघन हुआ । जब विदेशियों के आक्रमण हुए तो देश के राजा मिलकर नहीं चले । बल्कि कुछ ने आक्रमणकारियों का ही सहयोग किया । परिणाम : लाखों लोगों का कत्ल, लाखों स्त्रियों के साथ दुराचार, अपार धन-धान्य की लूटपाट, गुलामी ।l

चौथी आज्ञा ============== “कृतं मे दक्षिणे हस्ते जयो में सव्य आहितः” (अथर्व 7/50/8) अर्थात् “मेरे दाएं हाथ में कर्म है और बाएं हाथ में विजय ।” वेद की इस आज्ञा का उलंघन हुआ । लोगों ने कर्म को छोड़कर ग्रहों फलित ज्योतिष आदि पर आश्रय पाया । परिणाम : कर्महीनता, भाग्य के भरोसे रहकर आक्रान्ताओं को मुँहतोड़ जवाब न देना । धन-धान्य का अपव्यय, मनोबल की कमी और मानसिक दरिद्रता ।

पाँचवीं आज्ञा ============= “उतिष्ठत सं नह्यध्वमुदारा: केतुभिः सह । सर्पा इतरजना रक्षांस्य मित्राननु धावत ।। ” (अथर्व 11/10/1) अर्थात् “हे वीर योद्धाओ ! आप अपने झण्डे को लेकर उठ खड़े हो और कमर कसकर तैयार हो जाओ । हे सर्प के समान क्रुद्ध रक्षाकारी विशिष्ट पुरुषों ! अपने शत्रुओं पर धावा बोल दो ।” वेद की इस आज्ञा का भी उलंघन हुआ । जब लोगों के बीच बुद्ध ओर जैन मत के मिथ्या अहिंसावाद का प्रचार हुआ । लोग आक्रमणकारियों को मुँहतोड़ जवाब देने की बजाय मिथ्या अहिंसावाद को मुख्य मानने लगे । परिणाम : अशोक जैसे महान योद्धा का युद्ध न लड़ना । विदेशियों के द्वारा इसका फायदा उठाकर भारत पर आक्रमण ।

छठी आज्ञा ================= “मिथो विघ्राना उप यन्तु मृत्युम” (अथर्व 6/32/3) अर्थात् “परस्पर लड़ने वाले मृत्यु का ग्रास बनते हैं और नष्ट-भ्रष्ट हो जाते हैं ।” वेद की इस आज्ञा का उलंघन हुआ । परिणाम : भारत के योद्धा आपस में ही लड़-लड़कर मर गये और विदेशियों ने इसका फायदा उठाया ।

सातवीं आज्ञा ============== “न तस्य प्रतिमा अस्ति” (यजुर्वेद 32/3) अर्थात् “ईश्वर का कोई प्रतिमा नहीं है ।” लेकिन इस आज्ञा का भी उलंघन हुआ और लोगों ने ईश्वर को एकदेशी मुर्ति तक समेट दिया। परिणाम : ईश्वर के सत्य स्वरुप को छोड़कर भिन्न स्वरुप की उपासना और सत्य धर्म को भुला देना। मंदिर मे ढेर सारा धन आदि जमा हो जाना जो न धर्म रक्षा मे लगता है न अभाव गरीबी दूर करने में । ॥ तो आइये, फिर से वेदों की ओर लौट चलें . . . ॥

आचार्य, डा.अजय दीक्षित

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1 thought on “आइये चलें वैदिक संस्कृति की ओर | वेद की 7 आज्ञा”

  1. anil yadav says:
    December 19, 2019 at 2:34 pm

    very good points for arya samaj

    Reply

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