एक दीप उम्मीद का
दूर दिशाओं में दर्द भरा, फिर भी दिल मुस्काता है,
सूनी साँसों के संग-संग, सपना सरगम गाता है,
मंद-मंद मुस्कानों से, मन मंदिर महकाता है,
एक दीप उम्मीद का हर तम में तेज जलाता है।
पीड़ा पथ पर पल-पल भी, प्राणों को बहलाता है,
थरथर थकी हुई धरती को, थाम सहारा लाता है,
चंचल चाहत की चितवन में, चेतन चाँद चमकाता है,
एक दीप उम्मीद का हर तम में तेज जलाता है।
संकट से संघर्षों तक, साहस साथ निभाता है,
अंधियारे आँगन में आकर, अमृत आलोक बिखराता है,
सूखे सपनों की शाखों पर, स्नेह सुधा बरसाता है,
एक दीप उम्मीद का हर तम में तेज जलाता है।
रिमझिम रिश्तों की राहों में, राग नया भर जाता है,
मौन मनोहर माटी में भी, मधुमय मंत्र जगाता है,
“अजय” अटल अरमानों को, अद्भुत आस दिलाता है,
एक दीप उम्मीद का हर तम में तेज जलाता है।
– आचार्य डॉ अजय दीक्षित

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