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रस – आचार्य डॉ अजय दीक्षित

Posted on May 26, 2026May 26, 2026 by Pankaj Goyal

रस


रस रिमझिम रागों में, रमता रजनी-रंग,
रस से रचता रहता है, जीवन का सत्संग।

रस राधा की रुनझुन में, रस कान्हा की तान,
रस से रसमय हो उठता, मन-मंदिर मधुस्थान।

रस रजत रवि-किरणों में, रस राका की रात,
रस रच देता रेतों में, सपनों की सौगात।

रस रमता ऋषियों में, रस रम्य विचार,
रस से रोशन रहती है, मानवता की धार।

रस रागिनी रूपी सरिता, रस सरस सलिल,
रस से सजती सांसों की, सौरभ-सुंदर खिल।

रस रंगों की रेखा में, रस रोली-सा लाल,
रस से रक्षित रहती है, प्रेमिल पावन चाल।

रस रिमझिम वर्षा बनकर, रुनकें रजनी-द्वार,
रस से रचता रहता है, जग में जय-उत्सार।

रस ही रचना, रस ही रचयिता, रस ही जीवन-सार,
“अजय” रस बिना रीता रहता, राग-विराग संसार।

-आचार्य डॉ अजय दीक्षित

रस
रस

डा. अजय दीक्षित जी द्वारा लिखे अन्य गीत – 

  • स्वाभिमान
  • रोते-रोते मुस्कराना पडता है
  • स्वाभिमान पर शायरी
  • स्वाभिमान की गज़ल -आचार्य डॉ अजय दीक्षित
  • स्वाभिमान ही पहचान है
  • प्रेम के पंख
  • आत्मा और परमात्मा

     

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