”आत्मा और परमात्मा”
♦️♦️♦️♦️♦️♦️♦️♦️♦️
आत्मा की शांति में परमात्मा की ध्वनि बसती है,
जैसे बूंद में सागर की गहराई हँसती है।
खोजे जग बाहर-बाहर, मंदिर और द्वारों में,
पर सत्य छुपा बैठा है अपने ही विचारों में।
जब मन शांत हो, तो दूरी भी मिट जाती है,
आत्मा की ज्योति में परमात्मा झलक जाती है।
न कोई भेद वहाँ, न कोई दूरी का नाम,
एक ही सत्य है — वही मैं, वही परमधाम।
जो “अजय” खुद को जान गया, उसे पहचान गया,
आत्मा से परमात्मा तक का सफर आसान गया।
– आचार्य डॉ अजय दीक्षित

डा. अजय दीक्षित जी द्वारा लिखे अन्य गीत –
- स्वाभिमान
- स्वाभिमान पर शायरी
- स्वाभिमान की गज़ल -आचार्य डॉ अजय दीक्षित
- स्वाभिमान ही पहचान है
- प्रेम के पंख
- रस
- एक दीप उम्मीद का
Related posts:
एक दीप उम्मीद का
Ahoi Ashtami Wishes Images In Hindi
लोन लेने के फायदे
How to do an Online Saree Business
राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस | National Energy Conservation Day
दिसम्बर माह के राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय दिवस
नवम्बर माह के राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय दिवस
How to Buy Original Mahindra Spare Parts Online
स्टाफ हायर करने के 10 बेहतरीन टिप्स
क्यों मनाया जाता है इंजीनियर दिवस
