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‘पानी पिचकारी भर लायो हैं कन्हैया’- मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’

Posted on March 30, 2021March 30, 2021 by Viveka Goyal

Pani Pichkari Bhar Layo Re Kanhaiya Poem In Hindi – मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’ राजसमंद द्वारा रचित रचना ‘पानी पिचकारी भर लायो हैं कन्हैया’

‘पानी पिचकारी भर लायो हैं कन्हैया’ (Pani Pichkari Bhar Layo Re Kanhaiya)

घट घट पनघट घट घट भर के,
पानी पिचकारी भर लायो हैं कन्हैया|
गौरी – गौरी गोरे – गोरे हाथ में गुलाल लेके|
रंग रंगने आई अहीर की छोरियाँ|
पानी पिचकारी भर आयो हैं कन्हैया|

होठ लाल गाल लाल,
गाल पर बिखरे हैं बाल|
बाल झाल हर बार,
सुलझाने लगी सखियाँ|
पानी पिचकारी भर आयो हैं कन्हैया|

रंग पिचकारी माधव ने मधुर मारी,
अंग – अंग रंग से रंग गई गौरियां|
घट – घट झटपट रंग भरे नटखट|
हिरण सी चाल चल छुप गई गोपियाँ|
पानी पिचकारी भर लायो हैं कन्हैया|

नारी भींगी सारी भींगी,
नारी की सारी सारी भींगी|
चमकी चुनर भींगी,
भींग गई अंगियां|
पानी पिचकारी भर लायो है कन्हैया|

हरे – हरे पीले – पीले,
लाल – लाल नीले – नीले|
नीले नीले नभ में,
छाई हैं बदरियां|
पानी पिचकारी भर लायो हैं कन्हैया|

घर गली आंगन रंगमय हो गया|
रंग – मेघ में जन जन खो गया|
पनघट आंगन भी रंग रंगीला हो गया|
सतरंग रंग से भरी हैं घघरियां|
पानी पिचकारी भर लायो हैं कन्हैया|

मोर पंख केश – केश भींगा कंठ – कंठ हैं|
मुख माला बाल बाला भींगी हैं कमरिया|
राधा कृष्ण कृष्ण राधा एक अंग हो गए हैं|
राधा रस में रसीले हो गये हैं रसिया|
पानी पिचकारी भर लायो हैं कन्हैया|

मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’
राजसमंद

मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’ राजसमंद द्वारा रचित रचनाएं-

  • रुढ़ कर तुम मुझसे कहां जाओगी
  • काह्ना
  • कही से महक आई हैं
  • जन जन झूम रहा हैं
  • नहीं आता

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