Kahna – Janmashtami Poem in Hindi– आप सभी को कृष्णा-जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं। आज के लेख में हम आपके लिए जन्माष्टमी पर मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’ राजसमंद द्वारा रचित कविता प्रस्तुत कर रहे है।
काह्ना
काह्ना कंठ माला सजे
कानों में कुण्ड़ल डोले
माथे मोर मुकुट और
नैनों में हैं कजरा
श्याम श्याम कुंचित केश
गालों पर बिखरे हैं ऐसे
जैसे मंडराता हैं
सुमन पर भंवरा
ठुमक ठुमक लाला
यशोदा के पीछे घूमे
जैसे घेर रहा हो
गाय को कोई बछरा
लीलाधर की सुन्दर छवि
देख मन मोर नाचे
और संग तन नाचे
काह्ना का देख झलवा
रसीक की रसीली छवि
नैनों से जब कोई छीने
जैसे पूरी दे रहा हो
छीन कोई हलवा
मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’
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मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’ राजसमंद द्वारा रचित रचनाएं-
- काह्ना
- प्रेम गीत – ‘संझा देखो फूल रहीं है’
- कही से महक आई हैं
- जन जन झूम रहा हैं
- ‘मुझे अच्छा लगता हैं’
- ‘भारत पुण्य धरा हैं प्यारी’
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